रानू यादव: अक्षय कुमार और अरशद वारसी की आने वाली फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ के ट्रेलर ने दर्शकों को खूब हंसाया है। यह फिल्म न्यायपालिका पर आधारित कॉमेडी-ड्रामा है, जिसमें दोनों अभिनेताओं के बीच की जुगलबंदी और कॉमेडी टाइमिंग कमाल की है।हंसी और न्याय का मिश्रण फिल्म का ट्रेलर कॉमेडी और गंभीर कोर्टरूम ड्रामा का एक दिलचस्प मिश्रण दिखाता है। जॉली के किरदार में अक्षय कुमार और अरशद वारसी की भिड़ंत न सिर्फ हंसी पैदा करती है, बल्कि न्याय के सिद्धांतों पर भी प्रकाश डालती है।

अरशद वारसी ने पहले भी ‘जॉली’ का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीता था, और अब अक्षय कुमार के साथ उनकी केमिस्ट्री देखने लायक है। दोनों ही अपने-अपने किरदारों में बखूबी जमे हैं। उनकी बातचीत और एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिशें फिल्म का मुख्य आकर्षण हैं।

थोड़ा ज्यादा ड्रामा!
ट्रेलर में कुछ सीन थोड़े नाटकीय और जरूरत से ज्यादा लगते हैं। हालांकि, यह कॉमेडी फिल्म है, इसलिए इस तरह का अति-नाटकीयता शायद दर्शकों को पसंद भी आए। फिल्म में सौरभ शुक्ला ने भी अपने जज के किरदार में शानदार वापसी की है। उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन हमेशा की तरह दमदार हैं।

फिल्म की कहानी?
फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ की कहानी राजस्थान के एक गाँव से शुरू होती है, जहाँ एक किसान अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। एक उद्योगपति, हरिभाई खेतान (गजराज राव), अपनी महत्वाकांक्षी “बीकानेर टू बोस्टन” प्रोजेक्ट के लिए उस किसान की ज़मीन हथियाना चाहता है।

जब किसान को न्याय नहीं मिलता तो वह आत्महत्या कर लेता है। इसके बाद उसकी विधवा पत्नी (सीमा बिस्वास) न्याय पाने के लिए दिल्ली की कोर्ट पहुँचती है। यहीं पर कहानी में एंट्री होती है दोनों जॉली की – जॉली त्यागी (अरशद वारसी) और जॉली मिश्रा (अक्षय कुमार)।

शुरुआत में, दोनों वकील अलग-अलग पक्षों से लड़ते हैं और एक-दूसरे के मुवक्किलों को हड़पने की कोशिश करते हैं, जिससे कोर्टरूम में खूब हंसी-मजाक और नोक-झोंक होती है। लेकिन, जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता है, उन्हें किसानों की दुर्दशा का एहसास होता है। आखिरकार, दोनों जॉली अपनी व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता को खत्म कर देते हैं और मिलकर उस शक्तिशाली उद्योगपति और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं। फिल्म किसानों के मुद्दों, न्याय व्यवस्था और अमीरों के प्रभाव जैसे गंभीर विषयों को कॉमेडी और व्यंग्य के साथ पेश करती है।

एक्टिंग ?
अक्षय कुमार जॉली मिश्रा के रूप में अपनी पुरानी कॉमेडी टाइमिंग और ऊर्जा के साथ वापसी करते हैं। उनकी डायलॉग डिलीवरी और कोर्टरूम में हाजिरजवाबी दर्शकों को खूब हंसाती है। इसके साथ ही, वह अपने किरदार के भावनात्मक और गंभीर पक्ष को भी बखूबी पेश करते हैं। अरशद वारसी ने जॉली त्यागी के अपने चिर-परिचित किरदार को एक नई गहराई दी है। उनका सहज अभिनय और तीखे व्यंग्य अक्षय के साथ उनकी जुगलबंदी को और भी मजेदार बना देते हैं। दोनों का आमना-सामना और एक-दूसरे पर भारी पड़ने की कोशिशें ही फिल्म की जान हैं। सौरभ शुक्ला ने जज सुंदरलाल त्रिपाठी के रूप में एक बार फिर महफिल लूट ली है। वह अपने मजाकिया वन-लाइनर्स और शानदार एक्सप्रेशन्स से हर सीन को यादगार बना देते हैं। उनका किरदार न केवल हास्य पैदा करता है, बल्कि कोर्ट की गरिमा और न्याय के संतुलन को भी बनाए रखता है। कई समीक्षकों का मानना है कि वह फिल्म के असली स्टार हैं।कुल मिलाकर, फिल्म की पूरी कास्ट ने बेहतरीन काम किया है, जिससे यह फिल्म कॉमेडी और गंभीर मुद्दों का एक शानदार मिश्रण बन पाई है।

फिल्म का निर्देशन?
फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ का निर्देशन सुभाष कपूर ने किया है, जिन्होंने पिछली दोनों फिल्मों का भी सफल निर्देशन किया था। उनके निर्देशन में फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह कॉमेडी और गंभीर सामाजिक मुद्दों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाए रखते हैं। सुभाष कपूर ने फिल्म की कहानी को बेहद चतुराई से बुना है। उन्होंने कोर्टरूम के हास्य को न सिर्फ मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया है, बल्कि इसके जरिए न्याय व्यवस्था की कमियों और भ्रष्टाचार पर भी तीखा व्यंग्य किया है। फिल्म न तो बहुत ज्यादा गंभीर होती है और न ही सिर्फ कॉमेडी बनकर रह जाती है। निर्देशक ने कलाकारों की strengths का पूरा इस्तेमाल किया है। उन्होंने अक्षय और अरशद जैसे दो बड़े नामों की कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस का बखूबी इस्तेमाल किया है। साथ ही, सौरभ शुक्ला के किरदार को भी उन्होंने फिल्म का अहम हिस्सा बनाया है, जिससे उनकी मौजूदगी का असर हर सीन में दिखता है। फिल्म के कोर्टरूम सीन बहुत ही दमदार और सजीव लगते हैं। सुभाष कपूर ने इन दृश्यों को सिर्फ डायलॉगबाजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनमें एक भावनात्मक गहराई भी डाली है। ये दृश्य दर्शकों को हंसाते भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करते हैं।

देखें या नहीं?
अगर आप जॉली एलएलबी फ्रेंचाइजी के फैन हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। यह एक मजेदार और मनोरंजक अनुभव है जो आपको हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करेगा। ‘जॉली एलएलबी 3’ एंटरटेनमेंट और सामाजिक संदेश दोनों का मेल है। अक्षय और अरशद की टक्कर, सीमा बिस्वास का भावुक अभिनय, राम कपूर की मजबूत वकालत और गजराज राव का दमदार भ्रष्ट कारोबारी का किरदार, ये सब फिल्म को देखने लायक बनाते हैं। हालांकि, ओवरड्रामेटिक सीन्स, कमजोर महिला किरदार और फीका संगीत इसकी चमक कुछ कम कर देते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म आपको हंसाती भी है, सोचने पर मजबूर भी करती है और अंत में अदालत से गूंजती वही आवाज छोड़ जाती है ‘जय जवान, जय किसान’।

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