रानू यादव: एअर इंडिया विमान हादसे के चार पीड़ितों के परिजनों ने बोइंग और हनीवेल पर लापरवाही का मुक़दमा किया है। 12 जून को हुई इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान चली गई थी। पीड़ितों के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि इस दुर्घटना का कारण विमान में लगा ख़राब ईंधन कटऑफ स्विच था।
डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में मंगलवार को दायर की गई शिकायत के अनुसार, पीड़ित परिवारों का दावा है कि बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के ईंधन स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म या तो जानबूझकर बंद किया गया था या वो मौजूद ही नहीं था। इसकी वजह से टेकऑफ के समय पर्याप्त थ्रस्ट नहीं मिल पाया, क्योंकि ईंधन की सप्लाई में कमी आ गई थी।
परिजनों का कहना है कि बोइंग और हनीवेल, जिन्होंने स्विच को बनाया और लगाया था, उन्हें इस जोखिम के बारे में पहले से पता था। उन्होंने यह भी कहा कि 2018 में अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने कई बोइंग विमानों पर लॉकिंग मैकेनिज्म के बंद होने को लेकर चेतावनी भी दी थी।
हादसे को रोकने के लिए हनीवेल और बोइंग ने क्या किया?
शिकायत में कहा गया है कि स्विच को सीधे थ्रस्ट लीवर के पीछे लगाकर, “बोइंग ने प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित किया कि सामान्य कॉकपिट गतिविधि के परिणामस्वरूप अनजाने में ईंधन कटऑफ हो सकता है। इस आपदा को रोकने के लिए हनीवेल और बोइंग ने क्या किया?
बोइंग और हनीवेल ने टिप्पणी करने से इनकार किया!
अर्लिंग्टन, वर्जीनिया की कंपनी बोइंग ने बुधवार को इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ, उत्तरी कैरोलिना के शार्लोट स्थित हनीवेल ने भी तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। दोनों कंपनियां डेलावेयर में निगमित (रजिस्टर्ड) हैं। अमेरिका में इस विमान दुर्घटना के संबंध में यह पहला मुकदमा दायर किया गया है।
हादसे में 229 यात्रियों समेत 260 लोगों की जान गई!
परिजनों ने अपनी शिकायत में कांताबेन धीरूभाई पघदल, नाव्या चिराग पघदल, कुबेरभाई पटेल और बेबीबेन पटेल की मृत्यु के लिए मुआवज़े की मांग की है। वे उन 229 यात्रियों में से थे, जिनकी इस दुर्घटना में जान चली गई। विमान में सवार 12 क्रू मेंबर और ज़मीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए थे। सिर्फ एक यात्री इस हादसे में बच पाया था।
हादसे की वजह का पता नहीं लगा पाईं जांच एजेंसियां!
हादसे की असल वजह का पता लगाने में भारतीय, ब्रिटिश और अमेरिकी जांचकर्ता अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाए हैं। जुलाई में भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया था कि दुर्घटना से पहले कॉकपिट में भ्रम की स्थिति थी। इसी महीने, अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (FAA) के प्रशासक ब्रायन बेडफोर्ड ने कहा था कि उन्हें पूरा यकीन है कि इस हादसे के लिए कोई यांत्रिक खराबी या ईंधन नियंत्रण घटकों में हुई हलचल जिम्मेदार नहीं थी।
बोइंग के 737 मैक्स विमान पर 20 महीने का बैन!
साल 2018 और 2019 में बोइंग के 737 मैक्स विमानों की दो बड़ी दुर्घटनाओं के बाद कंपनी को कानूनी और अन्य खर्चों के कारण 20 अरब डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हुआ था। इन हादसों की वजह से बोइंग के सबसे ज़्यादा बिकने वाले इस विमान को 20 महीने तक उड़ान भरने से रोक दिया गया था।
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एअर इंडिया विमान हादसे में चार मृतकों के परिवारों ने बोइंग और हनीवेल के ख़िलाफ़ केस किया!
