गीत : मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई बड़े फैसले लिए हैं, लेकिन अब अफसरशाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई मंत्री और विधायक अफसरों के रवैए से नाखुश हैं और सार्वजनिक तौर पर इसकी शिकायत कर चुके हैं।

अफसरशाही के मुद्दे पर मंत्रियों की शिकायतें : मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर में अफसरों की शिकायत की, जिसे प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने भी माना। राजस्व मंत्री करण सिंह ने भी अफसरों के रवैए पर नाराजगी जताई है। खाद वितरण में भी जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच विवाद सामने आए हैं।

सरकार की व्यवस्थाएं : सरकार ने बड़े जिलों में प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं जो सत्ता और संगठन के बीच समन्वय का काम देखते हैं। भाजपा संगठन ने संभाग स्तर पर प्रभारी नियुक्त किए हैं जो समन्वय का काम करते हैं। इसके बावजूद अफसर और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

मुख्यमंत्री की कार्रवाई : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में अफसरों की शिकायत पर चर्चा की। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करें। सरकार ने अफसरों के रवैए को लेकर कड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।

विधायकों और मंत्रियों की चिंताएं : विधायक और मंत्री अफसरों के बेलगाम होने और काम नहीं करने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि अफसर उनकी बात नहीं सुनते और बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं। इससे विकास कार्यों में देरी हो रही है और जनता परेशान हो रही है।

आने वाले समय में क्या होगा : देखना होगा कि सरकार अफसरों के रवैए को लेकर क्या कार्रवाई करती है। क्या सरकार अफसरों को काबू में कर पाएगी या अफसरशाही और बढ़ेगी? आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। सरकार को जल्द ही इस पर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि विकास कार्य सुचारू रूप से चल सकें और जनता को राहत मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *