रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में कई नेता हैं जिनका अपना खास अंदाज़ और फैनबेस है। इनमें से एक हैं श्री नारायण पटेल, जो मांधाता (175) विधानसभा सीट से वरिष्ठ विधायक के तौर पर जाने जाते हैं। किसान परिवार से आए इस शख्स ने अपनी मेहनत, सामाजिक कामकाज और राजनीति का तजुर्बा जनता का भरोसा जीता है।
प्रारम्भिक जीवन और पढ़ाई
श्री नारायण पटेल का जन्म 1 दिसंबर 1956 को मुंदी (जिला खंडवा) में हुआ। उनके पिता, स्वर्गीय श्री चंदर सिंह पटेल, एक सम्मानित किसान थे। खेती-बाड़ी की पृष्ठभूमि ने उन्हें ईमानदारी, मेहनत और सेवा भावना का संस्कार दिया।
उन्होंने अपनी पढ़ाई हायर सेकेंडरी तक कर ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे खेती से जुड़े और साथ ही पेट्रोल पंप का व्यवसाय भी शुरू किया। बिजनेस में सफल होने के साथ-साथ उनका दिल हमेशा से समाज और लोगों की मदद करने का रहा।
परिवार और निजी जिंदगी
नारायण पटेल ने श्रीमती उमा बाई से शादी की है। उनके दो बेटे हैं। परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए, वे समाज और राजनीति में भी सक्रिय रहते हैं।
सामाजिक कामकाज और जनता की सेवा
श्री पटेल की छवि हमेशा एक जमीन से जुड़े नेता और समाजसेवी की रही है। उन्होंने खंडवा जिले में कई सहकारी समितियों और पंचायतों में भाग लिया। वे जिला पंचायत खंडवा के सदस्य भी रहे और किसानों के हक की बात उठाई। इसके अलावा, उन्होंने सेवा सहकारी समिति, बोरखेड़ा कला (पुनासा तहसील, जिला खंडवा) के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।
उनकी खास बात यह है कि वे गांव-गांव जाकर लोगों की समस्या सुनते और उन्हें हल करने की कोशिश करते हैं।
राजनीतिक सफर
उनका राजनीति में कदम जिला पंचायत से शुरू हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने कांग्रेस से जुड़ कर पार्टी में अपनी जगह बनाई।
पहली बार विधायक (2018)
2018 में, उन्होंने कांग्रेस की तरफ से मांधाता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह उनकी बड़ी राजनीतिक जीत थी। कांग्रेस सरकार के समय वे विधायक के रूप में काम करते रहे और अपने क्षेत्र का विकास किया।
भाजपा में शामिल होना (2020)
23 जुलाई 2020 को नारायण पटेल ने कांग्रेस की पहली सदस्यता छोड़ी। इसकी वजह उनका क्षेत्र की नीतियों और विकास से असंतोष था। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया।
उपचुनाव और जीत (2020)-
नवंबर 2020 के उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। जनता ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने दूसरी बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। 28 दिसंबर 2020 को उन्होंने भाजपा विधायक के रूप में शपथ ली।
लगातार तीसरी जीत (2023)-
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भी नारायण पटेल ने मांधाता सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। यह उनकी तीसरी लगातार जीत थी, जिसने यह साबित किया कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और पकड़ मजबूत है।
जनता का समर्थन और वोट
नारायण पटेल की जीत का बड़ा आधार ग्रामीण और किसान वर्ग है। खेती-किसानी से जुड़े होने के कारण वे किसानों की समस्याओं को बखूबी समझते हैं और उन्हें अपने एजेंडे में प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि मांधाता जैसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र में उन्हें लगातार मतदाताओं का समर्थन मिलता रहा है।
उनकी जीत का दूसरा कारण उनकी जमीनी कार्यशैली और जनसंपर्क है। वे सीधे जनता से संवाद करने और समस्याओं को सुनने के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
विधायक के रूप में कार्य
नारायण पटेल ने विधायक बनने के बाद कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें प्रमुख हैं:
- क्षेत्र में सड़क और पुलों के निर्माण की पहल।
- गांव-गांव में बिजली और पानी की समस्या का समाधान करने के प्रयास।
- कृषि से संबंधित योजनाओं को लागू करने और किसानों को लाभ दिलाने पर जोर।
- स्थानीय स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कार्य।
- युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने की कोशिश।
विवाद और आलोचनाएँ
हालाँकि पटेल का राजनीतिक जीवन काफी हद तक साफ-सुथरा रहा है, लेकिन राजनीति में सक्रिय रहने के कारण कुछ विवाद उनसे भी जुड़े हैं।
- कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर उन्हें “दल बदलू” नेता कहा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने सत्ता के लालच में दल बदल किया।
- 2020 के उपचुनाव के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी जीत संगठनात्मक ताकत और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के कारण हुई।
- क्षेत्र के कुछ इलाकों में अब भी सड़क, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाराज़गी रही है। आलोचकों का मानना है कि वादों के अनुरूप विकास कार्य अपेक्षित गति से नहीं हुए।
इन आलोचनाओं के बावजूद, पटेल का जनाधार बना हुआ है और वे अपने समर्थकों के बीच एक लोकप्रिय नेता के रूप में पहचान रखते हैं।
श्री नारायण पटेल का राजनीतिक जीवन संघर्ष, परिवर्तन और सफलता का मिश्रण है। कांग्रेस से राजनीति शुरू करने के बाद भाजपा में शामिल होकर उन्होंने लगातार तीन बार जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनकी जमीनी छवि, किसानों और आम जनता के बीच सक्रियता और क्षेत्रीय विकास के मुद्दे हैं।
