रिपोर्ट, काजल जाटव: भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए तीसरे सेमेस्टर के छात्र श्री ओम चौकसे को विश्वविद्यालय से बाहर कर दिया है। ये निर्णय हाल ही में 26 अगस्त 2025 को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग में हुई शिकायत के बाद लिया गया, जिसमें कहा गया कि NSUI के कुछ कार्यकर्ता शामिल थे।
घटना क्या है?
26 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग में कुछ NSUI कार्यकर्ताओं ने उत्पात मचाया। उस वक्त महिला स्टाफ को डराने-धमकाने की भी कोशिश की गई और कार्यालय पर कालीख लगाने का कार्य किया गया जिससे विभाग का माहौल काफी खराब हो गया।
विश्वविद्यालय ने इसे “गंभीर और निंदनीय” माना है। विभाग की शिकायत के बाद जांच कमेटी बनी। उसने सारे सबूत देखे और छात्रों से स्पष्टीकरण मांगे। ओम चौकसे का बयान समिति को संतोषजनक नहीं लगा। साथ ही, पता चला कि उसने दाखिले के दस्तावेज में दिए गए वादों का उल्लंघन किया है, जहां बताया गया था कि वो अनुशासन का पालन करेगा।
छात्रों की प्रतिक्रिया और लोकतांत्रिक सवाल
एक छात्र समूह ने निष्कासन के आदेश के बाद इसे “छात्र राजनीति को दबाने की कोशिश” कहा है। उनका आरोप है कि गेस्ट फैकल्टी की भर्ती में आरक्षण नियमों का ध्यान नहीं रखा गया था, और इसी विरोध में उन्होंने बाबा साहेब का पोस्टर लगाया।

उनका यह भी कहना है कि पोस्टर फड़वाने वाले प्रोफेसरों के खिलाफ आवाज उठाने के नाम पर NSUI समर्थक छात्र ओम चौकसे को बिना किसी गलत साबित हुए ही निशाना बनाया गया और विश्वविद्यालय से निष्काषित किया गया। छात्र नेताओं का मानना है कि यह कदम एकतरफा है और इससे लोकतंत्र की भावना को ठेस पहुंची है। वे कहते हैं कि विश्वविद्यालय को निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई कठोर कदम उठाया जाए।
अनुशासन समिति की रिपोर्ट
अनुशासन समिति की सिफारिश रिपोर्ट में कहा गया कि ओम चौकसे ने विश्वविद्यालय की इज्जत को ठेस पहुंचाई है। साथ ही, उसने विश्वविद्यालय में पढ़ाई और सुरक्षा व्यवस्था को खलल डाला। इसके आधार पर, प्रभारी कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने आदेश दिया कि चौकसे को “आगामी आदेश तक विश्वविद्यालय से निकाल दिया जाएगा।”

आधिकारिक आदेश आदेश में लिखा है कि – “आपने अपने वादे के दस्तावेज की खंड 02 और 03 का उल्लंघन किया है। जांच की रिपोर्ट के आधार पर, आपको अगले आदेश तक विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया है।” इसके साथ ही, आदेश की कॉपी कुलपति, विभागाध्यक्षों और छात्र के पिता श्री सत्य नारायण चौकसे (सिवनी, म.प्र.) को भेजी गई है।
कानूनी और प्रशासनिक बातें
विश्वविद्यालय अधिनियम (क्रमांक 15, 1990) के तहत MCU को अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने का अधिकार है। आदेश में कहा गया है कि यह निष्कासन “आगामी आदेश तक” है, यानी यह स्थायी नहीं है। यदि छात्र उचित अपील करता है या समिति आगे संतुष्ट होती है, तो फिर से स्थिति पर विचार हो सकता है।
महिला स्टाफ की सुरक्षा पर चर्चा
इस घटना में महिला कर्मचारियों को डराने-धमकाने का आरोप खास तौर पर गंभीर माना जा रहा है। विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि किसी भी महिला कर्मचारी को डराने-धमकाने की कोशिश “शून्य सहिष्णुता” के तहत आती है। इसी वजह से इस कदम को और भी कठोर बनाया गया है।
विश्वविद्यालय की सख्ती
विश्वविद्यालय का सख्त रवैया माखनलाल विश्वविद्यालय हमेशा अपने अनुशासन और शिक्षा के स्तर के लिए जाना जाता है। संस्थान का मानना है कि “शिक्षा का माहौल किसी भी तरह की अराजकता, राजनीतिक दखलअंदाजी या डराने-धमकाने वाली गतिविधियों से मुक्त रहना चाहिए।” यह कदम इसी सख्ती का नतीजा है। विश्वविद्यालय का संदेश है कि “किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
