रिपोर्ट, काजल जाटव

आशीष गोविंद शर्मा का जन्म 15 जनवरी 1978 को मध्य प्रदेश के देवास जिले के कन्नौद में हुआ था। उनके पिता श्री गोविंद शर्मा एक सम्मानित परिवार से ताल्लक थे। आशीष शर्मा ने अपनी पढ़ाई में एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन में ही उनको समाजसेवा, साहित्य, संगीत और लेखन का गहरा शौक था। यही रुचियां उन्होंने आगे चलकर राजनीति और समाजिक सेवा की तरफ ले गईं।

परिवार और निजी जीवन

आशीष शर्मा की शादी डॉ. सीमा शर्मा से हुई। उनके एक बेटे और एक बेटी हैं। वो वकालत करते हैं, मगर राजनीति और सामाजिक कार्यों को उन्होंने अपनी मुख्य जिंदगी बना लिया है। उनका घर देवास जिले के कन्नौद और भोपाल दोनों जगह है।

छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर

आशीष शर्मा का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ था।

  • वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ जुड़कर छात्र राजनीति में एक्टिव हुए।
  • कॉलेज कन्नौद के छात्र संघ के सचिव बने।
  • इसके बाद उन्होंने नगर पंचायत कन्नौद में पार्षद और अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया।
  • 2001 में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा (भा.ज.यु.मो.) की राज्य समिति के सदस्य बने।
  • 2007 में जिला उपाध्यक्ष और 2011 में देवास जिले के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
  • वो सांई सेवा समिति कन्नौद के भी सदस्य रहे और समाज सेवा में सक्रिय हिस्सा लिया।

विधानसभा में कदम और उसकी सफलताएँ

आशीष शर्मा की पकड़ी हुई लोकप्रियता और मजबूत संगठनात्मक कौशल ने उन्हें जल्दी ही प्रदेश राजनीति में पहचान दिलाई।

  • 2013 विधानसभा चुनाव: खातेगांव से भाजपा के टिकट पर पहली बार जीत हासिल की और चौदहवीं विधानसभा में पहुंचे।
  • 2018 विधानसभा चुनाव: फिर से जनता का समर्थन मिला और वे दूसरी बार विधायक बने।
  • 2023 विधानसभा चुनाव: लगातार तीसरी बार खातेगांव की जनता ने उन्हें विधानसभा पहुंचाया।

यही कारण है कि सिर्फ दस साल में ही वह क्षेत्र की राजनीति में अच्छी खासी पहचान बना गए।

कार्य और योगदान

आशीष शर्मा ने अपने कार्यकाल में लोगों की समस्याओं को सबसे पहले माना और इलाके के विकास पर ध्यान केंद्रित किया।

  • कृषि क्षेत्र: किसानों के लिए ज्यादा सुविधाएं लाने, समर्थन मूल्य पर फसलें खरीदने और सिंचाई योजनाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया।
  • शिक्षा और युवाओं: गांव में पढ़ाई को आसान बनाने और छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं को बढ़ावा दिया।
  • स्वास्थ्य और बाकी बुनियादी सुविधाएं: अस्पतालों की हालत सुधारने, सड़कें बनाने और पेयजल प्रोजेक्ट्स में सक्रिय हिस्सा लिया।
  • समाजसेवा: सांई सेवा जैसे समूहों के जरिए गरीबों की मदद करना और धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन करना।

जनता से जुड़ाव और वोट प्राप्ति

आशीष शर्मा की सबसे बड़ी ताकत है युवा और गांव के लोगों से मजबूत कनेक्शन। छात्र राजनीति से निकलने के बाद उन्होंने हर वर्ग में अपनी पकड़ बनाई। यही वजह है कि तीनों चुनावों में उन्हें क्षेत्र की जनता का समर्थन मिला।

  • 2013 में जीत साबित करती है कि भाजपा संगठन में उनकी मेहनत रंग लाई।
  • 2018 और 2023 में जीत दिखाती है कि उनका वोट बैंक मजबूत और स्थायी है।

विवाद और आलोचनाएँ

राजनीति में कोई भी विवाद आम बात है, और आशीष शर्मा उससे अलग नहीं हैं।

  • स्थानीय असंतोष: कुछ लोग कहते हैं कि काम की रफ्तार धीमी रही और कई योजनाएं अधूरी रह गईं।
  • गुटबाजी के आरोप: भाजपा के अंदर ही गुटबाजी की बातें उनके कार्यकाल के दौरान चर्चा में रहीं।
  • विपक्ष का आरोप: विपक्ष अक्सर कहते हैं कि वे ज्यादा पार्टी के भरोसे रहते हैं, जनता से कम जुड़ाव रखते हैं।

आशीष गोविंद शर्मा का सफर बताता है कि छात्र राजनीति से निकले नेता जनता का भरोसा जीतकर बड़े नेता बन सकते हैं। उसने कन्नौद से खाता गॉव तक अपनी पहचान बनाई है, संगठन, जनता और क्षेत्र के विकास को साथ लेकर। तीन बार विधायक बनना सिर्फ संगठन की ताकत ही नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और जनता से जुड़ाव का नतीजा है। उम्मीद है कि आगे भी वे खातेगाँव के इलाके में पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

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