रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में वक्त के साथ नए चेहरे उभरते रहे हैं, जो अपनी मेहनत, विचारधारा और संगठन क्षमता की बदौलत जनता का भरोसा जीतते आए हैं। इनमें से एक नाम है घनश्याम चंद्रवंशी, जिन्होंने 2023 में पहली बार शाजापुर जिले की कालापीपल विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने। घनश्याम भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से सामाजिक कामों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
9 मई 1984 को शाजापुर जिले के एक छोटे से गांव भुसायागढ़ा में जन्मे घनश्याम का परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। उनके पिता का नाम श्री राधेश्याम चंद्रवंशी है। शुरू से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाले घनश्याम ने राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में कदम रखा और समुदाय की सेवा में जुट गए।
परिवार और व्यक्तिगत जीवन
घनश्याम का शादी हो चुका है, और उनके एक बेटे और एक बेटी हैं। खेती-किसानी से जुड़े होने के नाते वे लोगों की समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं। इसी वजह से, राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने किसानों, मजदूरों और ग्रामीण विकास के मुद्दों को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया है।
राजनीतिक शुरुआत
घनश्याम की राजनीति की शुरुआत छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से हुई। वे वहां विभाग संयोजक और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जैसे अहम पदों पर रहे। फिर वे अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत में भी प्रदेश संगठन मंत्री और क्षेत्रीय सह-संगठन मंत्री के पदों पर आए। इन जिम्मेदारीयों ने उन्हें संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव बनाने का मौका दिया।
उल्लेखनीय उपलब्धियां
घनश्याम ने राजनीति में रहते हुए कई अनूठी पहलें की हैं।
- उन्होंने अपने क्षेत्र के 150 गांवों में एक घंटे में 21 करोड़ “ऊँ नमः शिवाय” मंत्र जप कर रिकॉर्ड बनाया।
- साइबर जागरूकता अभियान चलाते हुए करीब 35 हजार बच्चों को साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताए।
- उन्होंने अपने इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
2023 विधानसभा चुनाव और जीत
2023 में घनश्याम ने भाजपा से कालापीपल सीट पर चुनाव लड़ा। यह सीट पहले से ही मुकाबले वाली मानी जाती है। प्रचार के दौरान उन्होंने किसानों, युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार, सड़कों और सिंचाई जैसे मुद्दे उठाए। संगठनात्मक ताकत और जनता से संपर्क बनाकर उन्होंने जनता का भरोसा जीत लिया और पहली बार विधायक चुन लिए गए।
हालांकि इस मुकाबले में कांग्रेस के उम्मीदवार से कड़ी टक्कर मिली, मगर वोटों के अंतर से यह साबित हो गया कि उनकी मेहनत और संगठनात्मक प्रयास रंग लाए हैं।
विधायक बनने के बाद के कदम
विधानसभा सदस्य बनते ही घनश्याम चंद्रवंशी ने अपने इलाके के विकास के लिए कई योजनाओं पर काम शुरू किया।
- गांवों में सड़कें और पीने का पानी जैसी जरूरी परियोजनाओं को सबसे ऊपर रखा।
- किसानों की परेशानियों को विधानसभा में उठाया और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार से मदद मांगी।
- युवाओं के लिए खेल मैदान और स्कूल की सुविधाएं मजबूत करने पर ध्यान दिया।
- महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भीउन्होंने अहम रोल निभाया।
विवाद और आलोचनाएं
- कुछ विपक्षियों का आरोप है कि उनका “दुनिया का रिकॉर्ड” सिर्फ राजनीतिक प्रचार था, जिसका आम जनता को कोई फायदा नहीं पहुंचा।
- साइबर क्राइम जागरूकता अभियान को लेकर भी कहा गया कि यह सिर्फ दिखावा था, और बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया।
- स्थानीय विपक्ष ने यह भी आरोप लगाए कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने शुरूआती महीनों में जनता से सीधा संवाद कम कर दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखी।
इन सब विवादों के बावजूद, उनके समर्थक मानते हैं कि घनश्याम चंद्रवंशी एक युवा, जोशीले नेता हैं, जिनमें आगे जाकर प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम बनाने की कूबत है।
