रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में खिलचीपुर विधानसभा सीट से जुड़े नामों में हजारीलाल दांगी एक बहुत ही अहम शख्सियत हैं। उनका जन्म 6 जून 1951 को काशीखेड़ी गांव में हुआ था। वो एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और अपनी जिंदगी की शुरुआत समाजसेवा और शिक्षा से की। उन्होंने हायर सेकेंडरी और बी.टी.आई. (शिक्षक प्रशिक्षण) की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने थोड़ा समय खेती में बिताया और साथ ही सामाजिक कामों में भी हाथ बंटाया।
प्रारंभिक जीवन और समाजसेवा
- 1971-73: वे ग्राम पंचायत दोलाज (जनपद पंचायत खिलचीपुर) में पंचायत सचिव के तौर पर काम कर चुके हैं।
- 1973-1988: इस दौरान वे शिक्षक रहे और 15 साल तक बच्चों को पढ़ाते रहे।
- शिक्षा सेवा के साथ-साथ उन्होंने समाज सुधार के काम भी किए। उन्होंने सामूहिक विवाह समारोह कराने के लिए सामूहिक विवाह सम्मेलन समिति का गठन किया और लगभग 30 वर्षों तक इसके अध्यक्ष रहे।
- यह पहल न सिर्फ सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाती रही बल्कि गरीब परिवारों का आर्थिक सहारा भी बनती रही।
राजनीतिक सफर
हजारीलाल दांगी का राजनीति में करियर 1990 के दशक में शुरू हुआ।
- 1994-1998: वह जिला पंचायत राजगढ़ के अध्यक्ष थे। इस दौरान उन्होंने गांवों के विकास और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया।
- 1998: पहली बार वे ग्यारहवीं विधानसभा के लिए चुने गए और खिलचीपुर से विधायक बने।
- 2013: फिर से विधानसभा पहुंच कर चौदहवीं सीट से चुन लिए गए।
- 2023: इस बार भी जनता ने उन्हें खिलचीपुर से फिर से विधायक चुना, जिससे साबित हुआ कि उनका जन समर्थन अभी भी कायम है।
इसके अलावा, वे एपेक्स को-ऑपरेटिव बैंक और भूमि विकास बैंक में भी निर्देशक रह चुके हैं, जहां उन्होंने किसानों और छोटे कारोबारियों के काम को बढ़ावा दिया।
विकास कार्य
हजारीलाल दांगी का मुख्य फोकस हमेशा ग्रामीण विकास और समाजसेवा रहा है।
- सड़कों और बुनियादी ढांचे का निर्माण: विधायक निधि और राज्य सरकार की योजनाओं का उपयोग करके उन्होंने कई सड़कें बनवाईं और सही कराईं।
- कृषि और सिंचाई: किसानों के लिए सहकारी संस्थाओं के जरिए कर्ज और सिंचाई की सुविधाएं दीं।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: अपने शिक्षक अनुभव का फायदा उठाते हुए बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और गांवों में स्कूलों का भवन एवं संसाधन उपलब्ध कराए।
- सामाजिक पहल: सामूहिक विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों के ज़रिए गरीब और सुविधाओं से वंचित परिवारों की मदद की।
साल-दर-साल मतों की स्थिति
- 1998
- यह हजारीलाल दांगी का पहला विधानसभा चुनाव था।
- उन्होंने भाजपा की तरफ से मैदान में कदम रखा और जीत हासिल की।
- यह जीत उनकी राजनीति में एक मजबूत शुरुआत साबित हुई।
- 2013
- बहुत लंबे समय बाद, उन्होंने फिर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
- इस बार उन्हें 60,000 से ज्यादा वोट मिले।
- यह चुनाव उनकी “दूसरी पारी” थी, जिसने उन्हें जनता के बीच फिर से मजबूत नेता बना दिया।
- 2018
- इस बार वे भाजपा के उम्मीदवार थे और करीब 69,000 वोट मिले।
- लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार प्रवीन पाठक ने उन्हें लगभग 7,000 वोटों का फासला बनाकर हरा दिया।
- यह हार उनके लिए बड़ा झटका थी, और विपक्ष ने इसे “स्थानीय मुद्दों की अनदेखी” और “विकास में सुस्ती” से जोड़ा।
- 2023
- उन्होंने फिर से शानदार वापसी की और 1,00,000 से ज्यादा वोट हासिल किए।
- इस जीत के साथ, उन्होंने तीसरी बार विधायक बनार्इ।
- यह परिणाम साबित करता है कि जनता ने 2018 की निराशा के बाद फिर से उन पर भरोसा जताया।
विवाद और आलोचना
- हजारीलाल दांगी का नाम अक्सर बड़े राजनीतिक उलटफेरों में नहीं आता है।
- कुछ आसपास के मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2018 में उनकी हार के दौरान कांग्रेस ने उन पर “विकास में धीमे कदम” और “स्थानीय मुद्दों को गंभीरता से न लेने” का आरोप लगाया था।
- फिर भी, अभी तक उनके खिलाफ कोई बड़ा आपराधिक केस या भ्रष्टाचार का आरोप दर्ज नहीं है।
- कुछ आलोचक यह भी कहते हैं कि वह पारंपरिक शैली की राजनीति ही करते हैं, जिसमें युवाओं या नई सोच का कोई खास प्रभार नहीं दिखता।
हजारीलाल दांगी का राजनीतिक सफर शुरुआत समाजसेवा से हुआ और वह तीन बार विधायक बने। शिक्षक और समाजसेवी से लेकर विधायक बनने तक, उनकी पहचान साधारण छवि वाले नेता की रही है। 2013 और 2023 की जीत ने उनके कद को मजबूत किया है, जबकि 2018 में हार ने ये दिखा दिया कि जनता की उम्मीदों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
आज वे खिलचीपुर की राजनीति में भाजपा का मजबूत चेहरा हैं, और उनके प्रमुख मुद्दे अभी भी ग्रामीण विकास, शिक्षा और किसानों की भलाई ही हैं। विवादों से दूर रहने वाले दांगी का यह सफर यह साबित करता है कि साफ-सुथरी छवि और जमीनी जुड़ाव किस तरह लंबी भागीदारी के लिए जरूरी हैं।
