रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश के राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र (162) से भारतीय जनता पार्टी के नेता अमर सिंह यादव का नाम पिछले बीस सालों से राजनीति की खबरों में बना रहता है। किसान घराने से निकलकर राजनीति में आए यादव ने अपनी शुरुआत समाज सेवा और किसान संगठनों से की।

उनका जन्म 7 जून 1973 को खुजनेर (राजगढ़ जिले) में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. हीरालाल यादव और पत्नी का नाम श्रीमती कैलाशी बाई यादव है। उन्होंने बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई की और उसके बाद खेती-बाड़ी को अपना करियर बनाया।

राजनीतिक शुरुआत

अमर सिंह यादव ने अपनी राजनीति की राह 1990 के दशक में शुरू की।

  • 1990 में वे मध्य प्रदेश किसान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष चुने गए।
  • 1992 में वे भाजपा के मंडल अध्यक्ष बन गए।
  • 2001-2003 तक वे भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष रहे।
  • 2007-2012 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बने।
  • 2013 से वे भाजपा के जिला महामंत्री पद पर हैं।

इन जिम्मेदारियों ने उन्हें संगठन के अंदर मजबूत बनाया और जनता के बीच भी उनकी पकड़ बन गई।

विधायक के रूप में उनका सफर

पहली जीत – 2013

2013 में अमर सिंह यादव ने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और चौदहवीं विधानसभा में चुने गए। इस बार उन्होंने कांग्रेस के बापू सिंह तंवर को हराया। यह पल उनके राजनीतिक करियर का अहम मोड़ साबित हुआ।

2018 का चुनाव

2018 में उन्होंने फिर से चुनाव लड़ा, मगर जनता ने उन्हें फिर मौका नहीं दिया। कांग्रेस के बापू सिंह तंवर ने उन्हें 31,183 वोटों से हरा दिया। यह हार भाजपा के लिए भी झटका थी, क्योंकि उस साल राज्य में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया।

2023 का चुनाव

2023 में यादव ने तीसरी बार चुनावी मैदान में कूदे। इस बार उन्हें 1,04,032 वोट मिले, मगर बापू सिंह तंवर से पीछे रह गए। मगर ये आंकड़े दिखाते हैं कि राजगढ़ में भाजपा का आधार अभी भी मजबूत है, पर कांग्रेस की पकड़ गहरी है।

विकास कार्य और पहल

अमर सिंह यादव ने अपनी विधायक अवधि में कई मुद्दों पर काम किया।

  • सड़क और अवसंरचना – उन्होंने अपने क्षेत्र में सड़क निर्माण और संपर्क मार्गों को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
  • कृषि और किसान – एक किसान परिवार से आने के कारण उन्होंने किसानों के मुद्दों को विधानसभा में लगातार उठाया। क्षेत्र में सिंचाई और बिजली जैसी सुविधाओं के लिए उन्होंने आवाज़ बुलंद की।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रीय अभियान – “हर घर तिरंगा यात्रा” जैसे अभियानों का नेतृत्व किया और सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया।
  • शिक्षा और युवाओं के लिए पहल – अपने युवा मोर्चा कार्यकाल के दौरान खेल गतिविधियों और शिक्षा के अवसरों पर बल दिया।

साल-दर-साल मतों की स्थिति

  1. 2013
    • यह वह चुनाव था जब अमर सिंह यादव ने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता।
    • उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बापू सिंह तंवर को हराया।
    • इससे यादव को ज़िला राजनीति से राज्य स्तर की राजनीति में पहचान मिली।
  2. 2018
    • इस चुनाव में उनका सामना फिर से बापू सिंह तंवर से हुआ।
    • अमर सिंह यादव को 50,738 वोट मिले, जो कुल वोटों का लगभग 29.12% था।
    • लेकिन वे हार गए और बापू सिंह तंवर ने 31,183 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
    • इस हार से संकेत मिला कि जनता में कांग्रेस की पकड़ मजबूत हो गई है और भाजपा के खिलाफ असंतोष भी उभर रहा है।
  3. 2023
    • तीसरी बार चुनावी मुकाबले में उतरे।
    • इस बार यादव को 1,04,032 वोट मिले, यानी पिछली बार की तुलना में लगभग दोगुने वोट
    • फिर भी नतीजा उनके पक्ष में नहीं गया, और वे दूसरे स्थान पर रहे।
    • यहाँ दिलचस्प बात यह है कि वोटों की संख्या बढ़ी, लेकिन कांग्रेस की पकड़ और मजबूत निकली।

विवाद और आलोचनाएँ

राजनीतिक जीवन में अमर सिंह यादव का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा।

  • 1995 का आपराधिक मामला: उनके खिलाफ एक दंगे (IPC 148) और विस्फोटक पदार्थ से जुड़ी घटना (IPC 436) का केस दर्ज हुआ था। इस मामले में उन्हें पाँच साल की सज़ा और जुर्माना भी सुनाया गया था। हालांकि समय के साथ यह मामला निष्प्रभावी होता चला गया और उनके हालिया शपथपत्रों में आपराधिक पृष्ठभूमि का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
  • विपक्ष अक्सर उन्हें “स्थानीय मुद्दों को बड़े स्तर पर हल न कर पाने” को लेकर घेरता है। विशेषकर 2018 और 2023 की हार के बाद यह धारणा बनी कि जनता उनकी कार्यप्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी।

अमर सिंह यादव का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने संगठन से शुरुआत की, किसान और युवाओं के मुद्दों पर काम किया और दो बार विधानसभा में जनप्रतिनिधित्व करने का अवसर भी पाया। लेकिन उनकी राह में लगातार कांग्रेस के बापू सिंह तंवर बड़ी चुनौती बने रहे।

उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि ज़मीनी स्तर पर मेहनत करने वाला नेता जनता का भरोसा जीत सकता है, लेकिन लगातार जीत सुनिश्चित करने के लिए केवल संगठन नहीं, बल्कि स्थानीय विकास और जनता की उम्मीदों को पूरा करना भी ज़रूरी होता है।

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