रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल।भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय महिला नेत्री सरला बिजेंद्र रावत का राजनीतिक सफर गांव की मिट्टी से शुरू होकर प्रदेश विधानसभा तक पहुँचा है।
प्रारंभिक जीवन व शिक्षा
8 जुलाई 1980 को ग्वालियर जिले के ग्राम मसूरा में जन्मी सरला रावत ने हाईस्कूल तक की शिक्षा प्राप्त की। साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उनमें समाजसेवा और गरीबों की मदद का जज़्बा बचपन से ही रहा।
परिवार व निजी जीवन
विधायक रावत के पति बिजेंद्र रावत हैं और उन्हें तीन पुत्रों का आशीर्वाद प्राप्त है। कृषि से जुड़ा होना उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है। यही कारण है कि वे किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को नज़दीक से समझ पाती हैं।
राजनीतिक करियर की शुरुआत
उनका राजनीतिक सफर वर्ष 2003 से शुरू हुआ जब वे पहली बार ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गईं। लगातार मेहनत और जनसेवा की भावना के चलते उन्हें 2003 से 2008 तक गांव की सरपंच रहने का अवसर मिला।
जनपद अध्यक्ष का कार्यकाल
राजनीतिक रूप से और मज़बूत होते हुए वे 2009 में जनपद अध्यक्ष बनीं और 2014 तक इस पद पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति दी।
जिला और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी
वर्ष 2015 से 2021 तक वे जिला महामंत्री के पद पर रहीं। इसके बाद 2022 में उन्हें प्रदेश कार्य समिति का सदस्य चुना गया। इस दौरान संगठन में उनकी पकड़ और सक्रियता और मजबूत हुई।
विधानसभा सदस्यता
लंबे संघर्ष और निरंतर सेवा के बाद वर्ष 2023 में पहली बार उन्हें सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र (जिला मुरैना) से विधायक बनने का मौका मिला। यह उनके राजनीतिक जीवन की बड़ी उपलब्धि रही।
विशेषताएँ और छवि
सरला रावत की छवि एक जुझारू, सरल और जनता से जुड़े नेता की है। गरीब वर्ग के प्रति सेवा-भाव, समाजसेवा और किसानों की समस्याओं को उठाना उनकी प्राथमिकता रही है।
कुल मिलाकर, सरला बिजेंद्र रावत का राजनीतिक सफर संघर्ष, सेवा और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल है, जो आज उन्हें भारतीय जनता पार्टी की एक मजबूत महिला चेहरा बनाता है।
