रिया सिन्हा : अमेरिका ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को निशाने पर लेते हुए कड़ा बयान दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता वैश्विक शांति और लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
अमेरिका के आरोप
अमेरिका ने आरोप लगाया कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। पुतिन पर यूक्रेन युद्ध को लंबा खींचने का आरोप दोहराया गया, वहीं जिनपिंग पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों देशों की नीतियाँ पूरी दुनिया में अस्थिरता फैला रही हैं।
वैश्विक सहयोग की अपील
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक देशों को मिलकर पुतिन और जिनपिंग की नीतियों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधि का जवाब देगा। उन्होंने यूरोप और एशिया में अपने साझेदारों से एकजुट रहने की अपील की।
रूस और चीन की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
अभी तक रूस और चीन की ओर से अमेरिका के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देश जल्द ही इस पर तीखा जवाब देंगे। यह बयानबाज़ी आने वाले समय में अमेरिका-रूस और अमेरिका-चीन संबंधों में और तनाव बढ़ा सकती है।

