रिपोर्ट, काजल जाटव: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है। नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का सिलसिला तेज हो गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बयान काफी चर्चा में आ गया है। पटना में एक चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने उनकी मां को गालियां दी हैं, और यह सिर्फ उनकी मां का सम्मान ही नहीं है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक परंपरा और आस्था को भी चोट पहुंचाई है।

मां और छठ पर्व से जुड़ा मुद्दा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा, “मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। मां को गाली देने वाले शायद यह नहीं जानते कि भारत में मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक पवित्र भावना है। बिहार की मिट्टी पर मां को देवी माना जाता है और छठी मैया की पूजा की जाती है। कांग्रेस और राजद के नेताओं ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है, वह छठी मैया का ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का अपमान है। उन्हें बिहार की जनता और छठी मैया से माफी मांगी जानी चाहिए।”

यह बात सुनकर सभा में बहुत से लोग भावुक हो गए। पीएम मोदी ने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान न मानकर, इसे सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य से जोड़ दिया। इसी वजह से यह मुद्दा तुरंत बिहार की चुनावी राजनीति का अहम केंद्र बन गया।

भावनात्मक राजनीति का असर

भारत की राजनीति में भावनाओं का बहुत गहरा असर होता है। खासकर बिहार जैसे राज्यों में, जहां परिवार, परंपरा और धार्मिक आस्थाओं का वोटिंग पर सीधा असर पड़ता है। पीएम मोदी ने इस रणनीति के तहत मां और छठ पर्व को जोड़कर जनता की भावनाओं को समझाने की कोशिश की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा है। इससे बीजेपी को दो तरह का फायदा हो सकता है – पहला, जनता के बीच सहानुभूति बढ़ाना और दूसरा, विपक्ष को रक्षात्मक बनाने की कोशिश।

विपक्ष का जवाब और सफाई

कांग्रेस और आरजेडी के नेताओं ने इस पर कड़ा बयान दिया है। आरजेडी ने कहा, “दूसरों की माँ को जर्सी गाय, किसी महिला को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड बताने वाले के खास प्रवक्ता शुक्ला जी टीवी पर माँ को गाली देते है तो बीजेपी इस ग़ालीबाज को सम्मानित करती है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री खुद विभाजनकारी राजनीति करते हैं, और जब आलोचना होती है तो उसे व्यक्तिगत हमला बना देते हैं। हालांकि, ये सफाई कितनी असरदार होगी, यह चुनाव के परिणाम ही बताएंगे।

बिहार की जनता पर असर

बिहार में छठ का त्योहार अपनी संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। ये त्योहार सिर्फ धार्मिक रस्में नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का काम भी करता है। ऐसे में पीएम मोदी का छठी मैया का जिक्र लोगों के दिलों को छू जाता है।

खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में ये बातें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर भी मोदी के भाषण वाली क्लिप्स काफी वायरल हो रही हैं। भाजपा के नेता इसे चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, घर-घर जाकर ये संदेश दे रहे हैं कि विपक्ष ने छठ का सम्मान नहीं किया।

चुनावी समीकरण पर असर

बिहार चुनाव में जातीय समीकरण हमेशा ही बड़ा फैक्टर रहे हैं, लेकिन इस बार भावनात्मक मुद्दे भी खास हो गए हैं। भाजपा ‘मां और छठ’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए वोट पाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस-राजद गठबंधन बेरोजगारी, शिक्षा और आर्थिक प्रगति जैसे मुद्दों को सामने लाना चाहता है।

अगर पीएम मोदी का यह भावनात्मक कदम अच्छा चला, तो भाजपा को खासकर शहरों और ग्रामीण गरीब तबकों में बड़ा फायदा हो सकता है।

बिहार विधानसभा का चुनाव 2025 अब सिर्फ आर्थिक विकास और रोजगार तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें आस्था, जज़्बा और परिवारिक सरोकार भी काफी गहरे जुड़ गए हैं। पीएम मोदी का मां को गाली देने पर भावुक होना और उसे छठी मैया से जोडऩा एक सोची-समझी राजनीतिक योजना है, जिसका मकसद दिलों तक पहुंचना है।

अब देखना ये है कि जनता इस भावना को कितनी गंभीरता से लेती है, और क्या कांग्रेस-आरजेडी इस मुद्दे से उबर कर अपने एजेंडे को जनता तक पहुंचा पाते हैं या नहीं। बिहार के सियासी मैदान में ये घटनाक्रम आने वाले चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प और तीखा बना देगा।

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