रिपोर्ट, काजल जाटव: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मात्र 10 पैसे की गिरावट के साथ, यह 88.19 पर बंद हुआ है। यह गिरावट तब आई है जब डॉलर सूचकांक, जो कि छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की शक्ति को दिखाता है, 0.14% गिरकर 97.63 पर पहुंच गया है. आम तौर पर, डॉलर सूचकांक में गिरावट का मतलब होता है कि रुपया मजबूत होना चाहिए, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिससे बाजार में थोड़ी चिंता बढ़ गई है।
रुपए की गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?
रुपए के मूल्य में कमी के कई कारण हैं, जो घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर काम कर रहे हैं।
1. अमेरिका-भारत ट्रेड टेंशन: हाल ही में अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बन गई है. इस तनाव के चलते विदेशी निवेशक घबरा गए हैं और भारत से अपनी पूंजी निकाल रहे हैं। जब विदेशी पैसा बाहर जाता है, तो रुपए की मांग घटती है और डॉलर की बढ़ती है, जिससे रुपए कमजोर पड़ता है।
2. विदेशी निवेश का बाहर जाना (Capital Outflow): अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से भी फर्क पड़ रहा है. जब वहां ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक अपने पैसे भारत जैसे विकासशील देशों से खींचकर अमेरिका में डाल देते हैं, क्योंकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिलता है। इससे भारतीय रुपए पर दबाव बढ़ रहा है।
3. कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चे तेल को आयात करता है, और ये आयात डॉलर में होता है. तेल की कीमतें बढ़ने पर भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपए कमजोर होता है।
4. महीने के अंत में डॉलर की मांग: महीने के अंत में, कई कंपनियां अपना आयात बिल चुकाती हैं और अपने खातों को अपडेट करती हैं, जिससे डॉलर की मांग दोनों तरफ बढ़ जाती है. ये मौसमी वजहें भी रुपए पर दबाव बनाती हैं।
डॉलर सूचकांक और रुपए का विरोधाभास
इस बार की गिरावट आश्चर्यचकित कर देने वाली है क्योंकि डॉलर सूचकांक भी कमजोर हो रहा था, फिर भी रुपया और डॉलर में फर्क पड़ा. डॉलर सूचकांक (DXY) ये बताता है कि डॉलर यूरो, येन, पौंड, कनाडाई डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक के मुकाबले कितना मजबूत या कमजोर है। आमतौर पर, जब यह गिरता है, तो रुपए मजबूत होता है, मगर इस बार मामला उल्टा रहा है। इसका कारण यह है कि रुपए की गिरावट घरेलू कारणों और द्विपक्षीय मुद्दों से ज्यादा प्रभावित है, जैसे अमेरिका का टैरिफ और विदेशी पूंजी का निकलना, जिसने डॉलर सूचकांक गिरने के बावजूद रुपया कमजोर कर दिया है।
रुपए की कीमत गिरने का आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा
रुपए का कमजोर होना कई तरह से सीधे-सीधे हमारे हर दिन के जिंदगी को प्रभावित कर रहा है:
- महंगाई बढ़ना: भारत से बाहर से आने वाली चीजें, जैसे तेल, लैपटॉप और अन्य घरेलू सामान, अब ज्यादा पैसे में मिलेंगी, जिससे आम खर्चा बढ़ेगा।
- विदेश में घूमना और पढ़ाई: विदेशों में जाने वाले लोग और स्टूडेंट्स को अब अधिक खर्च करना पड़ेगा, क्योंकि डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
- निर्यातकों को बड़ा फायदा: कमजोर रुपये से भारतीय निर्यातक की कमाई मजबूत होती है। उनके प्रोडक्ट्स विदेशी बाजार में सस्ते हो जाते हैं, और बिक्री भी बढ़ती है।
- इन्वेस्टर्स का असर: विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस पर नजर रख रहा है और रुपये की गिरावट को संभालने के लिए डॉलर बाजार में बेचकर इंटरवेंशन कर सकता है. हालाँकि, अभी के वैश्विक और घरेलू हालात देखते हुए, रुपये को मजबूत बनाना आसान नहीं होगा।
