रिया सिन्हा: इंडोनेशियाई संसद (DPR) के सांसदों को प्रति माह दिए जा रहे अत्यधिक हाउसिंग अलाउंस (50 मिलियन रुपिया ≈ ₹2.7 लाख) की जानकारी व्यापक नाराज़गी के बीच सामने आई है। इस भत्ते को आर्थिक तंगी की परिस्थितियों में असंवेदनशील और अनुचित माना जा रहा है।
छात्रों और कामगारों द्वारा संसद भवन घेराव
25 अगस्त को जकार्ता में हजारों छात्रों, कामगारों और नागरिकों ने संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। वे सांसदों की भारी भत्तों और “घूसखोर अभिजात्यों” (corrupt elites) के खिलाफ सड़कों पर उतरे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और जल तोप का इस्तेमाल किया।
हिंसा में तब्दील होती प्रदर्शनें
विरोध ने बुधवार तक हिंसक रूप ले लिया—प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजियाँ कीं, बाइकें जलाईं और पुलिस से भिड़ंत की। कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय संसद भवनों में आग लगा दी। मैकासर (दक्षिण सुलावेसी) में यह हिंसा सबसे तेज़ थी, जहाँ भवन में आग लगने से कम से कम तीन लोग मारे गए और कई घायल हुए।
सरकार की प्रतिक्रिया और गिरफ्तारी
राष्ट्रपति प्राबोवो सुबिअंतो ने स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए जांच का आश्वासन दिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश जारी किया। अब तक लगभग 950 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, और अंतर्राष्ट्रीय दूतावासों ने नागरिकों से प्रदर्शन क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी दी है।

