कामना कासोटिया भोपाल:
नीट काउंसलिंग : सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी ढाई हजार सीटें, 23 हजार रैंक तक मिलेगा एडमिशन
नई दिल्ली। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए हो रही नीट-यूजी काउंसलिंग इस बार छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। पहले राउंड में करीब 1.18 लाख सीटों पर दाखिला पूरा होने के बाद अब दूसरे राउंड में करीब 8 हजार नई सीटें जुड़ेंगी। इनमें से ढाई हजार से ज्यादा सीटें सिर्फ सरकारी मेडिकल कॉलेजों की होंगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा, जिनकी रैंक 20 से 23 हजार तक है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए अब एमबीबीएस (MBBS) में दाखिले का सुनहरा मौका खुल गया है।
पहले राउंड का हाल
काउंसलिंग के पहले राउंड में कुल 1,18,098 सीटों पर दाखिले हुए। इस राउंड में ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और राज्य कोटा दोनों के आधार पर छात्रों को कॉलेज आवंटित किए गए। बड़ी संख्या में छात्रों को मनपसंद कॉलेज और कोर्स मिले, लेकिन कई सीटें बच भी गईं। वजह यह रही कि कुछ छात्रों ने ऊंचे विकल्प का इंतजार करते हुए पहले राउंड में दाखिला नहीं लिया। यही कारण है कि दूसरे राउंड में ज्यादा मौके मिलेंगे।
दूसरे राउंड में ज्यादा मौके
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के अनुसार, दूसरे राउंड में नए रजिस्ट्रेशन कराए जाएंगे। जिन छात्रों को पहले राउंड में सीट नहीं मिली थी या जिन्होंने भाग नहीं लिया था, वे नए सिरे से रजिस्ट्रेशन करके काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं। इस बार सीटें बढ़ने से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को फायदा होगा। खास बात यह है कि सरकारी कॉलेजों में करीब ढाई हजार नई सीटें जुड़ने जा रही हैं। यह उन छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है, जिनकी रैंक 20 से 23 हजार के बीच है।
मेडिकल सीटों की संख्या 1.25 लाख के पार
भारत में हर साल मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ रही है। 2021 में जहां 91,819 सीटें थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या 1,25,000 तक पहुंच जाएगी। इस साल करीब 7,000 से ज्यादा नई सीटें जोड़ी गई हैं। सिर्फ पिछले चार सालों में करीब 30 हजार सीटों की बढ़ोतरी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान सरकारी कॉलेजों का रहा है।
सालवार मेडिकल सीटें (एमबीबीएस)
- 2021 : 91,819
- 2022 : 99,763
- 2023 : 1,06,333
- 2024 : 1,17,981
- 2025 : 1,25,000+
इन आंकड़ों से साफ है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
नए सत्र की शुरुआत अब जल्दी
MCC के मुताबिक इस बार मेडिकल कॉलेजों का सत्र जल्दी शुरू होगा। 1 सितंबर से पहले ही दूसरे राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि छात्रों को समय पर पढ़ाई शुरू करने का मौका मिलेगा और उनका साल बर्बाद नहीं होगा। पहले अक्सर देखा जाता था कि लंबी काउंसलिंग प्रक्रिया के कारण छात्रों की पढ़ाई देर से शुरू होती थी।
छात्रों के लिए जरूरी जानकारी
- नया रजिस्ट्रेशन करना होगा – जो छात्र दूसरे राउंड में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें नया रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।
- पहले राउंड में दाखिला न लेने वालों को फायदा – जिन छात्रों को पहले राउंड में सीट मिली थी लेकिन उन्होंने दाखिला नहीं लिया, वे भी अब फिर से कोशिश कर सकते हैं।
- कट-ऑफ रैंक बढ़ेगी – सीटें बढ़ने की वजह से इस बार कट-ऑफ रैंक भी बढ़ जाएगी। यानी पहले जिन छात्रों को मौका नहीं मिल रहा था, अब उन्हें भी प्रवेश मिल सकता है।
- सरकारी कॉलेजों का आकर्षण – ढाई हजार से ज्यादा सरकारी सीटें जुड़ने के कारण छात्रों की पहली पसंद अब सरकारी कॉलेज होंगे, जहां फीस कम और सुविधाएं बेहतर होती हैं।
यह साल छात्रों के लिए बेहद खास है। पहले से ज्यादा सीटें होने की वजह से कई ऐसे विद्यार्थी, जो अब तक निराश थे, उन्हें एमबीबीएस की सीट मिलने का मौका मिलेगा। जिनकी रैंक 20 से 23 हजार के बीच है, उन्हें अब एडमिशन की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
इस बार नीट काउंसलिंग छात्रों के लिए उम्मीदों से भरी हुई है। सीटों की संख्या 1.25 लाख तक पहुंचना भारत की मेडिकल शिक्षा प्रणाली की बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल छात्रों को फायदा होगा बल्कि भविष्य में देश को ज्यादा संख्या में डॉक्टर भी मिलेंगे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह साल मेडिकल छात्रों के लिए ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है।
