Tibet airport

रिया सिन्हा: चीन ने तिब्बत के कई नागरिक हवाई अड्डों को डुअल-यूज़ एयरबेस, यानी सामाजिक और सैन्य दोनों उपयोग के लिए उपयुक्त बनाने की दिशा में जवाबदेह कदम उठाए हैं। विशेष रूप से नगरी-गुंसा एयरबेस को सक्रिय कर लिया गया है, जहाँ अब फाइटर विमानों और Y-20 ट्रांसपोर्ट विमान की तैनाती देखी गई है। यह बेस भारत के उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख के नजदीक स्थित है, जिससे हवाई निगरानी और युद्ध के समय रणनीतिक उपयोग की क्षमता मजबूत हुई है।

गोङ्गगर और शिगात्से में गुप्त संरचनाएं

तिब्बती राजधानी ल्हासा के गोङ्गगर एयरपोर्ट में व्यापक अपग्रेडेशन हुआ है—इसमें नए टर्मिनल, कार्गो कॉम्प्लेक्स, तीसरी रनवे, UAV हैंगर और संभवत: मजबूत संरक्षित आश्रय (hardened shelters) शामिल हैं, जहाँ लड़ाकू विमानों को सुरक्षित रखा जा सके। गोङ्गगर एयरपोर्ट पर KJ-500 AEW&C विमान और कई जेट विमानों की तैनाती भी बढ़ी है।

शिगात्से एयरबेस को भी अब पूरी तरह सैन्य एयरबेस में रूपांतरित किया गया है—जहाँ नागरिक उड़ानें बंद कर दी गई हैं। यहाँ एक अतिरिक्त रनवे, हेलिपैड, नए हैंगर, और UAV संचालन सुविधाएँ बन चुकी हैं।

 सीमा निगरानी और रणनीतिक पहल

चीन की यह रणनीति सिर्फ बुनियादी नागरिक सुविधा नहीं बल्कि सैन्य तैयारी के अनुरूप है। ये एयरबेस भारत-तिब्बत सीमा के निकट तैनात हैं—जहाँ से सीमा पर निगरानी, तेज़ सैनिक तैनाती, और संभावित सैन्य कार्रवाई करना आसान होगा।

भारत की प्रतिक्रिया

भारतीय वायु सेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने माना है कि चीन तिब्बत में अपनी वायु शक्ति को बनाए रख रहा है, लेकिन अभी वहां से आक्रामक ऑपरेशन की क्षमता सीमित है। भारत ने अपनी सीमावर्ती क्षेत्रों में विमानभवन और आधार संयंत्रों को सशक्त करने की कार्रवाई तेज कर दी है।

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