कामना कासोटिया भोपाल:
अनिल अंबानी की कंपनियों पर CBI और ED की बड़ी कार्रवाई: 2929 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का मामला
नई दिल्ली: मशहूर उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। हाल ही में उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) पर 2929 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का गंभीर आरोप लगा है, जिसके चलते CBI ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की है और FIR भी दर्ज की गई है। यह पूरा मामला देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
SBI ने आरोप लगाया है कि अनिल अंबानी की कंपनी RCOM को बैंक से 2929 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था, जिसे चुकाया नहीं गया। बैंक का कहना है कि यह लोन गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और तय नियमों का पालन नहीं किया गया। इसी को ध्यान में रखते हुए CBI ने कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया।
23 अगस्त को CBI ने मुंबई में RCOM के ऑफिस और अनिल अंबानी के घर पर छापे मारे। इसके साथ ही कंपनी से जुड़ी अन्य संस्थाओं पर भी कार्रवाई की गई। ये कार्रवाई केवल CBI की तरफ से नहीं हो रही, बल्कि ED (प्रवर्तन निदेशालय) भी इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया?
ED की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक “सोचा-समझा और सुनियोजित” फ्रॉड प्लान था। रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनी ने जानबूझकर बैंकों, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं को गलत जानकारी दी। जांच में जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, वो कुछ इस तरह हैं:
- कमजोर या बिना वैरिफिकेशन वाली कंपनियों को लोन देना।
- एक ही डायरेक्टर और एड्रेस का कई कंपनियों में उपयोग।
- जरूरी दस्तावेजों का अभाव।
- फर्जी कंपनियों में पैसे का ट्रांसफर।
- पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन का इस्तेमाल (जिसे ‘लोन एवरग्रीनिंग’ कहते हैं)।
क्या आरोप हैं अनिल अंबानी की अन्य कंपनियों पर?
कुछ दिन पहले SBI ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को “फ्रॉड” घोषित कर दिया था। बैंक का दावा है कि कंपनी ने 31,580 करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसमें से 13,667 करोड़ रुपये अन्य कंपनियों के लोन चुकाने में और 12,692 करोड़ रुपये दूसरे अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए गए। यह वित्तीय अनियमितता मानी जा रही है।
SBI की भूमिका क्या है?
SBI ने यह केस CBI को भेजा था क्योंकि लोन धोखाधड़ी के तहत यह मामला बड़ा और गंभीर था। इससे पहले बैंक की ओर से अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है, जो इस समय मुंबई NCLT में लंबित है।
ED की कार्रवाई
इससे पहले 23 जुलाई को भी ED ने अनिल अंबानी की कंपनियों के 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह रेड करीब 3000 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी मामले में की गई थी।
CBI की FIR में कौन-कौन नामजद?
CBI ने इस मामले में RCOM के अलावा रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कॉर्पोरेट फाइनेंस लिमिटेड का नाम लिया है। साथ ही इन कंपनियों से जुड़े कुछ अधिकारियों के नाम भी FIR में शामिल हैं, जिनमें पूर्व CEO गुनन कपूर का नाम भी है।
यह मामला केवल एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। CBI और ED की जांच से यह साफ हो रहा है कि कैसे बड़े-बड़े कॉरपोरेट समूह भी नियमों की अनदेखी कर बैंकों को चूना लगा सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आगे कानून क्या रुख अपनाता है और अनिल अंबानी व उनकी कंपनियों को क्या कानूनी सजा मिलती है।
