ऋषिता गंगराडे़
कर प्रणाली में सुधार की ओर बड़ा कदम
भारत सरकार ने हाल ही में आयकर अधिनियम, 2025 को लागू करने की घोषणा की है। इस नए अधिनियम का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है। लंबे समय से करदाताओं द्वारा जटिल प्रक्रिया और कई स्तरों की दिक्कतों को लेकर शिकायतें आती रही हैं। ऐसे में यह संशोधित अधिनियम करदाताओं और कर अधिकारियों दोनों के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है।
डिजिटल मूल्यांकन और पारदर्शिता
इस अधिनियम का सबसे बड़ा परिवर्तन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। अब अधिकांश मामलों में फेस-टू-फेस इंटरैक्शन की आवश्यकता नहीं होगी। कर रिटर्न की जांच और मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि कर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होगी। भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
करदाताओं को राहत और नई श्रेणियाँ
नए अधिनियम के तहत कर स्लैब में भी बदलाव किया गया है। सरकार ने मध्यमवर्ग और निम्न-मध्यमवर्गीय करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से न्यूनतम कर दरों में कटौती की है। वहीं, उच्च आय वर्ग के लिए कुछ अतिरिक्त प्रावधान जोड़े गए हैं ताकि कर संग्रहण संतुलित रहे। इसके अलावा, छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप को भी विशेष कर छूट और प्रोत्साहन देने की घोषणा की गई है।
तकनीक और कर संग्रहण
आयकर अधिनियम, 2025 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कर चोरी को रोकना और रियल-टाइम निगरानी करना है। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए कई रियायतें दी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार के राजस्व में पारदर्शी वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आयकर अधिनियम, 2025 को भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। इससे जहां करदाताओं को आसानी और राहत मिलेगी, वहीं सरकार के लिए कर संग्रहण की प्रक्रिया और प्रभावी होगी। हालांकि, वास्तविक प्रभाव का आकलन आने वाले वर्षों में ही किया जा सकेगा, जब यह अधिनियम पूरी तरह लागू होकर व्यवहार में दिखेगा।
स्रोत: भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज एवं सार्वजनिक डोमेन जानकारी (Wikipedia, Government Reports)।
