रिया सिन्हा: भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता के बाद बीजिंग ने भारत को रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिजों) की सप्लाई पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत की ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा और रक्षा उद्योग को इन खनिजों की भारी आवश्यकता है।

चीन न केवल रेयर अर्थ बल्कि उर्वरकों और टनल-बोरिंग मशीनों पर लगे निर्यात प्रतिबंध भी हटाने के लिए सहमत हुआ है। इस कदम से भारत को तत्काल राहत मिलेगी क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, स्मार्टफोन, हेल्थकेयर उपकरणों और एयरोस्पेस सेक्टर में रेयर अर्थ तत्वों की मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ है। हाल के महीनों में आपूर्ति संकट के कारण भारतीय कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही थी। अब इस फैसले से उद्योग जगत को राहत तो मिलेगी, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं कि भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम तेज करने होंगे। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता लंबे समय तक सुरक्षित नहीं है, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक हो।

इसी बीच, महिंद्रा एंड महिंद्रा और ऑटो कंपोनेंट निर्माता उषा मिंडा जैसी कंपनियाँ पहले ही देश में रेयर अर्थ मैग्नेट के स्थानीय उत्पादन की योजना बना रही हैं। सरकार भी इस दिशा में प्रोत्साहन दे रही है ताकि भविष्य में चीन पर निर्भरता कम हो सके।लेकिन अब इंतज़ार है भारत और चीन के सुधरते रिश्ते का ।भारत रक्षा प्रणाली में एक मजबूत देश साबित होना चाहता है

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