रिया सिन्हा:मोदी सरकार ने संसद में एक ऐतिहासिक विधेयक पेश कर राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने लोकसभा में ऐसे प्रावधान वाले तीन विधेयक रखे हैं, जिनके अनुसार यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो उसे पद छोड़ना अनिवार्य होगा। यदि इस्तीफा नहीं दिया जाता है, तो उसकी सदस्यता और पद स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2025 पेश किए।
संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में बदलाव होगा, ताकि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री इस नियम के दायरे में आ जाएं। केंद्र शासित प्रदेश विधेयक में धारा 45 और जम्मू-कश्मीर विधेयक में धारा 54 में संशोधन कर यही प्रावधान लागू किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून संवैधानिक मर्यादा और जनविश्वास को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर आरोप झेल रहे नेता जेल में रहते हुए भी सत्ता का दुरुपयोग न कर सकें। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को फंसाया जा सकता है और चुनी हुई सरकारों को अस्थिर किया जा सकता है।
अमित शाह ने यह भी प्रस्ताव रखा कि इन विधेयकों को विस्तृत अध्ययन के लिए संसदीय संयुक्त समिति को भेजा जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो यह भारतीय राजनीति में स्वच्छ छवि और जवाबदेही लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
