ऋषिता गंगराडे़
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के नगझिरी गांव में रविवार को संत बोंदरु बाबा की समाधि स्थल पर हर साल लगने वाला यह अनोखा मेला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां दूर-दूर से महिलाएं संतान सुख की प्राप्ति की कामना लेकर आती हैं। मान्यता है कि इस मेले में कच्ची कैरी (कच्चा आम) खाने से महिलाओं की गोद भर जाती है और वे संतान सुख प्राप्त करती हैं।
गांव के प्राचीन मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के जिलों और राज्यों से महिलाएं अपनी मन्नत पूरी करने के लिए यहां पहुंचती हैं। मंदिर में पूजन-अर्चन करने के बाद महिलाएं कच्ची कैरी का सेवन करती हैं। आस्था से भरा यह अनुष्ठान पीढ़ियों से चला आ रहा है और स्थानीय लोग इसे चमत्कारी मानते हैं।
मेले में केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि सामाजिक मेल-जोल और पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। गांव में जगह-जगह पर ग्रामीणों द्वारा प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस मेले का हिस्सा बनते हैं। मेले में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर दुबारा आकर कच्ची कैरी चढ़ाते हैं और प्रसाद बांटते हैं।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कई महिलाएं वर्षों तक संतान सुख से वंचित रहीं, लेकिन यहां आकर मन्नत मांगने के बाद उनकी गोद भर गई। इसी वजह से आस्था और बढ़ती चली गई। कई परिवार हर साल संतान प्राप्ति के बाद आभार प्रकट करने के लिए यहां आते हैं और कैरी व प्रसाद बांटते हैं।
एक श्रद्धालु महिला ने बताया, “हम यहां तीसरी बार आए हैं। पहली बार संतान की कामना के लिए आए थे, अब बेटा होने के बाद धन्यवाद देने पहुंचे हैं।” इस तरह की अनेक कहानियां इस मेले की महत्ता को और गहरा करती हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है और आज भी उतनी ही आस्था के साथ निभाई जाती है। उनका कहना है कि जिन महिलाओं की गोद वर्षों से खाली है, वे यहां आकर इस अनुष्ठान में भाग लेती हैं और बहुतों की मुराद पूरी भी होती है।
आस्था, विश्वास और परंपरा का अनोखा संगम बना नगझिरी गांव का यह मेला आज न केवल खरगोन जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की धार्मिक पहचान बन चुका है।
