कामना कासोटिया भोपाल:
दिल्ली में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हुआ। निज़ामुद्दीन इलाके में ऐतिहासिक हुमायूं मकबरे के पास बने एक कमरे की छत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए थे, जिन्हें बचाने के लिए एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान चलाया। मलबे से अब तक नौ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
हादसा कैसे हुआ
शुक्रवार की सुबह अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के बाद हुमायूं मकबरे के पास बने एक पुराने कमरे की छत भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि उस समय कई लोग कमरे के अंदर मौजूद थे। भारी भरकम छत और मलबे के नीचे दबने से छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, कुछ लोग घायल भी हुए जिन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कमरे की हालत काफी जर्जर थी। लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं हुई थी। स्थानीय लोगों ने कहा कि लगातार बारिश होने के कारण छत की मिट्टी गीली हो गई थी, जिसके चलते वह अचानक गिर पड़ी।
बचाव कार्य में तेजी
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस, दमकल और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई। कई घंटे की मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया। अफसरों ने बताया कि मलबे से 15 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से छह की मौत हो चुकी थी।
दमकल विभाग के अधिकारी ने कहा, “छह शवों को मलबे से निकाला गया है। इनमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। नौ अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।”
मृतकों की पहचान
प्रशासन ने बताया कि मृतकों की पहचान हो चुकी है। सभी मजदूर वर्ग से जुड़े लोग थे, जो इसी परिसर में काम करते थे और यहीं रहते थे। फिलहाल शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
प्रशासन ने दिया बयान
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि यह मकबरा एएसआई (भारतीय पुरातत्व विभाग) के अधीन है। वहां मजदूर और उनके परिवार रह रहे थे। जिला प्रशासन ने कहा है कि यदि जांच में यह बात सामने आती है कि लोग अवैध रूप से साइट पर रह रहे थे, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि अभी प्राथमिकता रेस्क्यू और राहत कार्य है। मृतकों के परिजनों को मदद पहुंचाई जा रही है। मामले की पूरी जांच कराई जाएगी ताकि आगे ऐसा हादसा दोबारा न हो।
एएसआई का बयान
भारतीय पुरातत्व विभाग ने कहा कि हुमायूं मकबरे का मुख्य ढांचा बिल्कुल सुरक्षित है और इस हादसे का उससे कोई संबंध नहीं है। हादसा पास की एक अन्य इमारत में हुआ, जो मजदूरों के रहने के लिए बनाई गई थी।
एएसआई ने साफ किया कि मकबरे का मुख्य स्मारक संरक्षित है और पर्यटकों के लिए भी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि साइट पर कुछ लोग अनधिकृत तरीके से रह रहे थे, जिसकी जांच की जा रही है।
हादसे से इलाके में दहशत
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। स्थानीय लोग दुखी हैं कि प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया, जबकि यह इमारत काफी जर्जर हालत में थी।एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमने कई बार शिकायत की थी कि इमारत की हालत खराब है। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब इसकी कीमत मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
शुक्रवार का यह हादसा दिल्ली के लिए एक चेतावनी है। यह बताता है कि समय रहते जर्जर भवनों की पहचान और मरम्मत कितनी जरूरी है। अगर प्रशासन सतर्क रहे और लोग भी अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हों, तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है। फिलहाल हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार गहरे सदमे में हैं और जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन और एएसआई पर अब यह जिम्मेदारी है कि सच्चाई सामने आए और भविष्य में इस तरह के हादसे दोबारा न हों।
