कामना कासोटिया भोपाल:

प्रधानमंत्री का लाल किले से संबोधन: एक देश-एक संविधान की भावना पर जोर
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12वीं बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। सुबह-सुबह राजधानी के ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बधाई दी और देश की प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार साझा किए।

इस बार उनके भाषण का एक अहम संदेश था — एक देश-एक संविधान” की भावना को मजबूत करना। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले को देश की एकता और अखंडता के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि हर नागरिक के समान अधिकार और समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम है।

धारा 370 हटाने का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, धारा 370 हमारे देश के लिए एक अस्थायी प्रावधान था, जो दशकों तक स्थायी जैसा बना रहा। हमारी सरकार ने साहसिक निर्णय लेते हुए इसे हटाया, ताकि जम्मू-कश्मीर भी देश के बाकी हिस्सों के समान विकास की राह पर आगे बढ़ सके।” उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले के बाद वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, और निवेश के नए अवसर खुले हैं।

विकास और आत्मनिर्भर भारत पर जोर
मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, और इसमें देशवासियों की मेहनत और सरकार की योजनाओं का बड़ा योगदान है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि कैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रम युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र के सुधार, किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास, और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़क पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

गरीब और मध्यम वर्ग के लिए योजनाएं
मोदी ने अपने भाषण में गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग के लिए चल रही योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिले हैं, प्रधानमंत्री आवास योजना से लाखों लोगों को पक्का घर मिला है, और आयुष्मान भारत योजना से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि सरकार बेटियों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल और विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया, जिससे महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो रही हैं।

पर्यावरण और सतत विकास
भाषण में पर्यावरण संरक्षण पर भी खास जोर दिया गया। मोदी ने कहा कि जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन में भारत तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करें और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाएं।

भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में देशवासियों से अपील की कि वे 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संकल्प लें। उन्होंने कहा कि इसके लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा चाहे वह छात्र हो, किसान, मजदूर, व्यापारी या सरकारी कर्मचारी।

उन्होंने कहा, आज हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, वह हमें नए भारत की ओर ले जाएगी — ऐसा भारत जहां हर किसी को समान अवसर मिले, जहां कोई भी पीछे छूटे, और जहां हर भारतीय गर्व से कह सके कि हम एक देश, एक संविधान और एक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

स्वतंत्रता दिवस पर यह भाषण न केवल सरकार की अब तक की उपलब्धियों का लेखा-जोखा था, बल्कि आने वाले समय के लिए रोडमैप भी। एक देश, एक संविधान का नारा, विकास की गाथा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा — ये तीनों बातें प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य धुरी रहीं।

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