ऋषिता गंगराडे़

सोशल मीडिया व कुछ वायरल वीडियो प्लेटफार्मों (जैसे YouTube, Instagram) पर यह दावा खूब चर्चा का विषय रहा कि प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शिवपुराण कथा के लिए 31 लाख रुपये दक्षिणा (शुल्क) तय करते हैं। इस लेख में हम जानें—इसमें कितना सत्य है और क्या यह केवल अफवाह है।

मामले का तथ्यों के आधार पर विश्लेषण

  • रोजनदगांव कथा रद्द: बताया गया कि पंडित प्रदीप मिश्रा की कथाएँ रोजनदगांव में एक आयोजन के दौरान उस दक्षिणा के अभाव में रद्द कर दी गई थीं। आयोजकों ने कहा कि तय 31 लाख में से केवल 15 लाख रुपये ही समय पर उपलब्ध हो पाए, जिससे बाकी राशि न मिलने के कारण कथा रद्द करनी पड़ी।
  • पंडित जी का स्पष्टिकरण: कई वीडियो (YouTube) और रिपोर्ट्स में पंडित प्रदीप मिश्रा ने खुद उत्तर दिया कि 31 लाख वाले दावे बिलकुल गलत हैं। उन्होंने इस कहानी को खारिज किया या “सटीक जवाब” दिया कि वह इतने दक्षिणा नहीं लेते हैं।

31 लाख रुपये दक्षिणा का दावा:

  • अफवाह है—ऐसी कोई विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट या आधिकारिक घोषणा नहीं मिली।
  • रोजनदगांव की घटना इससे स्थापित होता है कि कथाएं कुछ मामलों में वित्तीय कारणों से रद्द हुई थीं—लेकिन 31 लाख दक्षिणा की मांग किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई।
  • पंडित प्रदीप मिश्रा का बयान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दावा सत्य नहीं है।

पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिवपुराण कथा के लिए 31 लाख रुपये दक्षिणा की खबर झूठ (अफवाह) प्रतीत होती है, जबकि कथाएँ रद्द हुई थीं, उनका कारण केवल निर्धारित राशि का पूरा न जमा हो पाना था। सबसे महत्वपूर्ण बात—पंडित जी ने खुद इस दावे का खंडन किया।

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