रानू यादव: उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली गांव में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई, जिससे चार लोगों की मौत हो हो गई है। कई घर तेज़ बहाव में बह गए हैं और भारी नुकसान हुआ। एनडीआरएफ़ के डीआईजी मोहसेन शाहेदी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बताया, “अब तक की जानकारी के मुताबिक़ 40 से 50 घर बह चुके हैं और 50 से अधिक लोग लापता हैं।”
धराली, गंगोत्री धाम से लगभग 20 किलोमीटर पहले स्थित एक प्रमुख पड़ाव है, जहां हर साल चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ठहरते हैं। घटना की जानकारी पाते ही एसडीआरएफ,सेना, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें राहत कार्यों में लगी हुई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसी घटनाएं क्यों होती है? आखिर बदल क्यों फटते हैं?क्या इन घटनाओं के लिए मौसम विभाग पहले से चेतावनी दे सकता है?
बादल फटना क्या होता है?
बादल पटना एक ऐसी घटना है जिसमें किसी छोटे से क्षेत्र में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है यह सामान्य बारिश से काफी अलग होती है , क्योंकि इसमें पानी इतनी तेजी से बरसता है कि उसे इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 1 घंटे में 100 मिली मीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है तो उसे बादल फटना कहा जाता है। यह घटना अक्सर पहाड़ी और पर्वतीय इलाकों में होती है।
बादल फटने के पीछे का कारण है?
जब मैदानी इलाकों से गर्म और नमी वाली हवा ऊपर उठती है और पहाड़ों से टकराती है, तो यह तेजी से ठंडी होती है। ठंडी होने पर हवा में मौजूद नमी पानी की बूंद में बदल जाती है। पहाड़ों की वजह से बदल एक ही जगह पर रुक जाते हैं और उनमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा जमा हो जाती है। जब बादलों में पानी का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह अचानक से एक साथ बहुत तेजी से बरसने लगता है, जिसे बादल फटना कहते हैं।
पानी का दबाव बढ़ने से पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है और जमीन खिसकने लगती है, जिससे भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आने की वजह से कई लोगों की जान चली जाती है, घर, सड़के और पुल बह जाते हैं।
बादल फटने की घटना सिर्फ मानसून के मौसम में ही होता है?
यह पूरी तरह से सच नहीं है कि बादल फटने की घटना केवल मानसून के मौसम में होती है। हालांकि, यह सही है कि भारत में, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में, बादल फटने की अधिकांश घटनाएं मानसूनी हवाओं के कारण ही होती हैं। मई महीने से लेकर जुलाई और अगस्त तक भारत के उत्तरी इलाके में इस तरह का मौसमी प्रभाव देखने को काफी मिलता है।
बादल फटने का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है?
बादल फटने का पहले से सटीक अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि यह एक बहुत ही अचानक होने वाली और स्थानीय घटना है।
हालांकि, मौसम विभाग (IMD) कुछ खास मौसम संबंधी स्थितियों की पहचान कर सकता है, जिनसे यह पता चलता है कि किसी क्षेत्र में बहुत भारी बारिश हो सकती है। ये स्थितियां अक्सर बादल फटने का कारण बनती हैं।
बादल फटने की भविष्यवाणी के लिए उन्नत रडार नेटवर्क और स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) की ज़रूरत होती है, जो पहाड़ी इलाकों में कम संख्या में उपलब्ध हैं।
