रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल। में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
जिसमें “पॉक्सो एक्ट” यानी लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यशाला 7 अगस्त 2025 को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की जाएगी।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों की जानकारी देना, कानून की समझ बढ़ाना और इससे जुड़ी सरकारी एवं सामाजिक ज़िम्मेदारियों को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे से शुरू होगा।
मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि
इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री का इस आयोजन में शामिल होना इस बात को दर्शाता है कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर है।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इन मंत्रियों की उपस्थिति से यह कार्यक्रम और अधिक प्रभावी तथा व्यापक बन जाएगा।
क्या है पॉक्सो एक्ट ?
“पॉक्सो एक्ट” यानी Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है। इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन शोषण, उत्पीड़न, अश्लील हरकतें और अन्य अपराधों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस कानून के अंतर्गत कड़ी सजा और त्वरित न्याय की व्यवस्था की गई है।
इस कार्यशाला में इसी कानून की बारीकियों को समझाने और इससे जुड़े लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशिक्षण और अनुकूलन का अवसर
कार्यशाला का आयोजन खास तौर पर उन लोगों के लिए किया जा रहा है जो बच्चों के साथ काम करते हैं – जैसे कि शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पुलिस अधिकारी, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य, डॉक्टर, वकील आदि। इन सभी को अनुकूलन (sensitization) और प्रशिक्षण (training) दिया जाएगा ताकि वे बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक स्थिति में सही तरीके से काम कर सकें और बच्चों को न्याय दिला सकें।
क्यों ज़रूरी है ऐसी कार्यशालाएँ ?
देश में बाल यौन शोषण के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार पीड़ित बच्चा या उसके परिवार को यह तक नहीं पता होता कि उनके साथ जो हुआ वह अपराध है, या फिर वो डर और शर्म के कारण शिकायत नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में जागरूकता बहुत जरूरी है।
इस कार्यशाला के माध्यम से न केवल कानून को समझाने का काम होगा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को यह भी सिखाया जाएगा कि ऐसे मामलों में कैसे संवेदनशीलता से पेश आया जाए, बच्चे को कैसे समर्थन दिया जाए, और कैसे न्याय की दिशा में सही कदम उठाया जाए।
भोपाल में होने वाली यह कार्यशाला बच्चों के हितों की सुरक्षा को लेकर एक सार्थक पहल है। इससे जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर उन्हें प्रशिक्षित और जागरूक किया जाएगा।
इससे न सिर्फ़ बच्चों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि पूरे समाज में बच्चों के अधिकारों को लेकर एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
