रानू यादव : बिहार में सारण जिले की 13 वर्षीय नेहा कुमारी का निधन हुआ था, जिसके बाद उनके परिजनों ने उनकी आँखें दान करने का फैसला किया। जिससे दो नेत्रहीन लोगों को रोशनी मिल पाएगी।इस नेत्रदान को बिहार में अब तक का सबसे कम उम्र का नेत्रदान माना जा रहा है।

यह नेत्रदान पटना के आईजीआईएमएस (IGIMS) अस्पताल में करवाया गया। यह नेत्रदान अंगदान दिवस 3 अगस्त के दिन किया गया, जो इस नेक काम को और भी खास बनाता है।नेहा को पैनक्रिएटाइटिस बीमारी था। किसके कारण उसकी 13 साल की उम्र में निधन हो गया है। अपनी इस बीमारी के साल के अंदर ही उसकी मौत हो गई।

कैसी है फैमिली बैकग्राउंड?
नेहा कुमारी के पिता नाम राधेश्याम शाह और उनकी माता का नाम लीलावती देवी है। नेहा पांच भाई बहनों में सबसे छोटी थी। नेहा के पिता दुर्गापुर स्टील प्लांट में काम करते हैं। नेहा छठवीं क्लास की स्टूडेंट थी।


नेहा की बीमारी की शुरुआत अचानक बुखार से हुई। आमतौर पर गांव में इस वायरल समझ कर घरेलू इलाज शुरू किया गया ,लेकिन बुखार लगातार बढ़ता गया और नेहा की हालत बिगड़ती गई ।कुछ दिनों में उसे पीलिया और फिर पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई।

इंटेसिव केयर यूनिट में हो रहा था इलाज!
जब दर्द ठीक नहीं हुआ तो उसे जनवरी 2025 में IGMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने पैनक्रिएटाइटिस जैसी बीमारी के बारे में बताया। यह बीमारी एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। जिसमें शरीर खुद के अंगों पर धीरे-धीरे हमला करता है, और सारे अंग खराब हो जाते हैं। इस बीमारी की वजह से उसे खाना डाइजेस्ट होने में भी काफी दिक्कतें आती थी।

दरअसल, सारण जिले के हथिसार टोला कोरर निवासी 13 वर्षीय नेहा कुमारी पैंक्रियाटाइटिस रोग से पीड़ित थी।आर्गन फेल्योर, संक्रमण और इंटरनल ब्लीडिंग होने पर परिवार वाले आनन फानन में पटना आइजीआइएमएस लेकर आए।तुरंत मेडिकल इंटेसिव केयर यूनिट में भर्ती कर इलाज शुरू हुआ, लेकिन लाख प्रयास के बावजूद भी जान नहीं बच सकी।

गांव वालों की आंखें नम और चेहरे पर गर्व!
नेहा के परिवार के इस फैसले से पूरे गांव में नेहा के जाने के दुख के साथ गर्व का माहौल बना हुआ है। इतनी छोटी उम्र में नेहा के नेत्रदान से किसी और की आंखों को रोशनी मिल पाएगा।

आप भी ऐसे कर सकते हैं नेत्रदान!

किसी के निधन होने पर छह घंटे में नेत्रदान किया जा सकता है।जिस व्यक्ति का नेत्रदान कराया जा रहा है, उसकी आंखों पर रुई गीली कर रख दे ।कमरे का पंखा बंद कर दें, जिससे आंखों की कॉर्निया में नमी बनी रहे। इसके साथ ही मृतक के सिर के नीचे तकिया लगा दें।

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