रानू यादव : जम्मू और कश्मीर में 5 अगस्त 2025 को आर्टिकल 370 हटाने के 6 साल पूरे हो गए हैं। 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आर्टिकल 370 हटाया गया था। इस कदम की वजह से जम्मू और कश्मीर में शासन कामा नागरिक भागीदारी और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव हुआ है।
इस फैसले के तहत राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किया गया और उसे पूरी तरह भारतीय संविधान के ढांचे में शामिल किया गया है।
आजादी के बाद भी जम्मू कश्मीर का विवाद नहीं टला!
1947 में जब भारत आजाद हुआ तो यहां लगभग 527 रियासतें थी इन रियासतों के सामने तीन विकल्प थे।
1.वह भारत के साथ हो सकते हैं।
2.पाकिस्तान के साथ जा सकते हैं।
3.स्वतंत्र देश के रूप में रह सकते हैं।
राजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर को स्वतंत्र देश बनाने की लगातार कोशिश की!
जब देश आजाद हुआ तो उसे समय सरदार पटेल और पंडित नेहरू की राजनीतिक और कूटनीतिक पहलू से कई रियासतें भारत के साथ जुड़ती गई लेकिन जम्मू और कश्मीर को राजा हरि सिंह ने अंतिम दम तक अपनी रियासत को स्वतंत्र देश बनाए रखना की लगातार कोशिश की। लेकिन कश्मीर पर पाकिस्तान की नजर बनी रही और कबालियों के जरिए पाकिस्तान सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया। जब राजा हरि सिंह ने राज को अपने हाथ से जाते हुए देखा तो उन्होंने जम्मू कश्मीर को भारत में शामिल होने की सहमति दी। वहीं से जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया। लेकिन धारा 370 के कारण जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला रहा।
इस दर्जे की वजह से भारत का अभिन्न अंग होने के बाद भी जम्मू कश्मीर में भारत के कई कानून लागू नहीं होते थे।
नरेंद्र मोदी सरकार में 370 किया समाप्त!
साल 2019 में नरेंद्र मोदी की सरकार मैं केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को दिए धारा 370 को समाप्त कर दिया। अब इस धारा को समाप्त हुए 6 साल पूरे होने को है ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस धारा के समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में कितना बदलाव हुआ है।
5 अगस्त 2019 को हटा धारा 370
केंद्र सरकार के इस कदम की वजह से जम्मू और कश्मीर में शासन और नागरिक भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस फैसले की वजह से राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया और उसे पूरी तरह भारतीय संविधान की ढांचे में शामिल किया गया है। इन सब परिवर्तनों में से एक लोकतंत्र में भागीदारी बड़ी। पंचायत चुनाव में 70% अधिक मतदान हुआ। 2020 में जिला विकास परिषद चुनाव पहला बड़ा कदम था।
2024 के राज्य विधानसभा चुनाव ने राजनीतिक भागीदारी को और मजबूत किया इसमें दक्षिण कश्मीर के उभरते सरपंचों सहित युवाओं और महिलाओं की भागीदारी शामिल है। उसके अलावा शिक्षा और सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला। जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कई क्षेत्रों में बदलाव और विकास देखा गया है। सरकार के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य राज्य को मुख्यधारा में लाना, विकास को गति देना और स्थानीय लोगों को अधिक अधिकार देना है।
1. लोकतांत्रिक और राजनीतिक विकास: अनुच्छेद 70 हटाने के बाद त्रिस्तरी ई पंचायती राज व्यवस्था को पूरी तरह से लागू किया गया है जिसमें जिला विकास परिषद के चुनाव भी शामिल थे इससे जमीन स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हुआ है।
2. कानून और अधिकार: केंद्र सरकार के 170 से अधिक कानून जो पहले जम्मू और कश्मीर में लागू नहींहोते थे, जिससे स्थानी निवासियों और अन्य राज्यों के नागरिकों को समान अधिकार मिला है।
3. चुनावी प्रक्रिया में बदलाव: परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव भी हुए जिसमें युवा और महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि देखि गई।
4. आर्थिक विकास और निवेश: सरकार का दावा है कि अनुछेद 370 atthani के बाद जम्मू और कश्मीर में निवेश में दोगुना से अधिक की वृद्धि हुई है। बुनियादी ढांचे, पर्यटन और उद्योग क्षेत्र में नेट निवेश आ रहे हैं।
5. पर्यटन को बढ़ावा: पर्यटन क्षेत्र में काफी बदलाव हुआ है इससे स्थानी अर्थव्यवस्था को लाभ मिल गया है श्रीनगर को यूनेस्को ने ‘वर्ल्ड क्राफ्ट ‘सिटी का दर्जा भी दिया है।
6. सामाजिक और सुरक्षा से संबंधित विकास: सरकार के अनुसार अनुच्छेद 370 रखने के बाद आतंकवादी घटनाओं और पत्थर बाजी में भारी कमी आई है।
7. आरक्षण और अधिकार: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग EWS के लिए 10% आरक्षण लागू किया गया है। के अलावा पश्चिमी पाकिस्तान सरेन और वाल्मीकि समुदाय जैसे लोगों को भी वोटिंग का अधिकार और अन्य लाभ मिले हैं।
8.नए शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना:
केंद्र सरकार ने क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), जम्मू ,भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), और अवंतीपोरा नए मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज की विकास हुआ है।
