कामना कासोटिया, भोपाल: देश में तकनीक जितनी तेज़ी से बढ़ रही है, उतनी ही तेज़ी से साइबर अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। गृह मंत्रालय की एक हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में डिजिटल अपराधों जैसे साइबर क्राइम, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी जैसी घटनाओं में 401% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न सिर्फ चिंता का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हमारे देश में डिजिटल सुरक्षा को लेकर अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।
क्या हैं डिजिटल अपराध?
डिजिटल या साइबर अपराध वे अपराध होते हैं, जो इंटरनेट, मोबाइल फोन या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से किए जाते हैं। इसमें ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, फर्जी कॉल्स, ई-मेल स्कैम, फेक ऐप्स के ज़रिए ठगी और डार्क वेब का इस्तेमाल शामिल होता है। अब तो धोखेबाज़ नकली वेबसाइट या लिंक भेजकर लोगों की पर्सनल जानकारी चुरा रहे हैं और बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे हैं।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले चार सालों में ऐसे मामलों में चौगुनी से भी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। 401% की वृद्धि का मतलब है कि अगर चार साल पहले ऐसे 1000 केस दर्ज होते थे, तो अब यह आंकड़ा बढ़कर 5000 से ऊपर पहुंच गया है।
इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल, खासकर ग्रामीण इलाकों में। स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट ऐप्स की बढ़ती पहुंच के साथ-साथ जागरूकता की कमी, सुरक्षा उपायों की अनदेखी और फर्जीवाड़ा करने वालों की तकनीकी चालाकी भी इसकी वजह बनी है।
कौन-कौन बन रहे हैं शिकार?
साइबर अपराधों का शिकार हर वर्ग का व्यक्ति हो रहा है — छात्र, बुज़ुर्ग, गृहिणियां, व्यापारी, यहां तक कि कई सरकारी अधिकारी भी इनसे अछूते नहीं हैं। खासकर छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लोग, जो हाल ही में डिजिटल दुनिया से जुड़े हैं, उन्हें आसानी से धोखा दिया जा रहा है।साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी, मोबाइल कंपनी कर्मचारी, या पुलिस बताकर लोगों से ओटीपी, पासवर्ड और खाता जानकारी पूछते हैं और फिर उनके खातों से पैसे निकाल लेते हैं।
सरकार क्या कर रही है? गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए एक विशेष साइबर सेल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) शुरू किया है। इसके अलावा राज्यों में भी साइबर पुलिस स्टेशन खोले जा रहे हैं और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
क्या करें बचाव के लिए? किसी अनजान लिंक या वेबसाइट पर क्लिक न करें। फोन या मैसेज पर किसी से अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक डिटेल साझा न करें। डिजिटल पेमेंट ऐप्स इस्तेमाल करते समय दो-चरणीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) ज़रूर चालू रखें।अगर किसी प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
डिजिटल युग में कदम रखने के साथ हमें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी खुद ही लेनी होगी। जितना सतर्क हम सड़क पर चलते समय रहते हैं, उतना ही सतर्क हमें इंटरनेट पर भी रहना चाहिए। एक छोटी सी गलती आपके पूरे बैंक खाते को खाली कर सकती है।सरकार की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जब तक हर नागरिक खुद सतर्क नहीं होगा, तब तक इस पर रोक लगाना मुश्किल होगा। हमें मिलकर साइबर अपराध के खिलाफ एक डिजिटल दीवार खड़ी करनी होगी।
