रानू यादव: भारतीय महिला क्रिकेट की महानतम खिलाड़ियों में से एक, मिताली राज, का सफर समर्पण, लगन और अथक प्रयासों की एक अनूठी मिसाल है। उनकी कहानी सिर्फ रनों और शतकों की नहीं, बल्कि एक ऐसे दौर की है जब महिला क्रिकेट को बहुत कम पहचान मिलती थी।
जब 1999 में मिताली में डेब्यू किया तो महिला क्रिकेट को वूमेन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया चलती थी। लेकिन 2006 के अंत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने महिला क्रिकेट की कमाई अपने हाथ में ले ली।
प्रारंभिक जीवन और क्रिकेट की शुरुआत!
राजस्थान के जोधपुर में एक तमिल परिवार में जन्मी मिताली राज का बचपन हैदराबाद में बीता। शुरुआती दिनों में उनका रुझान भरतनाट्यम की तरफ था और वह एक बेहतरीन डांसर थीं। लेकिन उनके पिता दोराई राज, जो भारतीय वायु सेना में थे, चाहते थे कि उनकी बेटी अनुशासित बने। इसलिए उन्होंने मिताली को अपने बड़े भाई के साथ क्रिकेट एकेडमी भेजना शुरू कर दिया।
मिताली को शुरुआत में क्रिकेट में कोई खास रुचि नहीं थी, लेकिन एकेडमी के कोच ने उनके अंदर छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। मिताली ने जल्द ही क्रिकेट को अपना जुनून बना लिया और भरतनाट्यम को छोड़कर पूरी तरह से क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित किया। यह एक ऐसा फैसला था जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट का भविष्य भी बदल दिया।
अंतरराष्ट्रीय करियर और उपलब्धियां!
सिर्फ 16 साल की उम्र में, साल 1999 में, मिताली ने भारतीय सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया और उसके बाद का कैरियर शानदार रहा। 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले ही वनडे मैच में 214 रनों की नाबाद पारी खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री की और वह टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी। यह उनकी शानदार यात्रा की शुरुआत थी। उनका करियर 23 साल तक चला, जो महिला क्रिकेट में सबसे लंबे करियर में से एक है। 2024 में शेफाली वर्मा ने दोहरा शतक लगाकर इस रिकॉर्ड के बराबरी की।
मिताली ने अपने नाम दर्ज किया कई बड़े रिकॉर्ड !
वह महिला वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 7,805 रन बनाए हैं।वह अकेली महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने 7,000 से ज्यादा वनडे रन बनाए हैं।वह वनडे में लगातार सात शतक और 64 अर्धशतक बनाने वाली पहली खिलाड़ी हैं। महिला वनडे क्रिकेट में मिताली के नाम सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड है।
उन्होंने दो बार (2005 और 2017) भारतीय टीम को आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुंचाया।
मिताली को उनकी शांत कप्तानी और बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए “भारतीय महिला क्रिकेट की लेडी तेंदुलकर” के नाम से भी जाना जाता है।
पहचान और सम्मान!
मिताली ने महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी। उनके समय में महिला क्रिकेट को बहुत कम सुविधाएं मिलती थीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके नेतृत्व और प्रदर्शन ने भारतीय महिला क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उनके योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं, जिनमें अर्जुन पुरस्कार (2003) और पद्म श्री (2015) शामिल हैं।
8 जून 2022 को, मिताली राज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया!
जिससे एक शानदार युग का अंत हुआ। उनकी कहानी करोड़ों लड़कियों को प्रेरित करती रहेगी कि अगर सच्ची लगन और कड़ी मेहनत हो तो हर सपने को सच किया जा सकता है। वह सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की प्रतीक हैं।
महिला खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा!
मिताली के खेल का प्रभाव युवा महिला खिलाड़ियों पर साफ़ दिखता है। 2005 के वनडे वर्ल्ड कप सेमी फाइनल में मिताली की 95 रन की पारी देखकर बैटर वेदा कृष्णमूर्ति ने अपने अपने घर वालों को स्ट्रीट रॉयल में शामिल होने के लिए मनाया। इसके साथ ही स्मृति मंधाना भी कहती है कि जब उन्होंने क्रिकेट को चुना तो हर किसी का सपना मिताली जैसा बनना था।
मिताली ने अपनी इस उपलब्धि के बारे में कहती है कि मैं बहुत लकी हूं कि मैं उस बदलाव का हिस्सा बन पाई जो महिला क्रिकेट खास करके भारत में हो रहा है। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दिन को देख पाऊंगी जब लोग पुरुष और महिला क्रिकेट के बराबर को स्वीकार करेंगे।
