कामना कासोटिया, भोपाल: आज़ादी के इतने सालों बाद भी अगर देश के बच्चे खंडहर जैसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हों, तो यह वाकई शर्मनाक स्थिति है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है मध्यप्रदेश के कटनी जिले से, जहां एक सरकारी स्कूल “साधूराम हाई स्कूल” पूरी तरह से जर्जर हालत में पहुंच चुका है। यह स्कूल अब शिक्षा का मंदिर कम और कबाड़खाना ज़्यादा नज़र आता है।
स्कूल की दीवारें टूटी हुई हैं, छत कहीं से टपक रही है, तो कहीं पूरी तरह गिर चुकी है। स्कूल के कमरों में गंदगी फैली हुई है, फर्श उखड़ा हुआ है, और खिड़कियों में कांच तक नहीं बचे हैं। कक्षाओं में बैठने के लिए न तो पर्याप्त डेस्क हैं और न ही कुर्सियाँ। कुछ कमरों में तो जानवरों का डेरा है और कहीं-कहीं नशेड़ी बैठे देखे गए हैं। यह हाल देखकर कोई यकीन नहीं करेगा कि यहाँ कभी बच्चे पढ़ाई करते होंगे।
बच्चों की जान खतरे में
इस स्कूल में बच्चों के लिए न तो साफ पानी की व्यवस्था है, न ही शौचालय की कोई सुविधा। बरसात के दिनों में पूरी बिल्डिंग में पानी भर जाता है, जिससे दीवारें और ज़्यादा कमजोर हो जाती हैं। छत से कभी भी प्लास्टर या ईंट गिर सकती है, जिससे बच्चों की जान को सीधा खतरा बना हुआ है। ऐसे में यहाँ पढ़ाई करने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों की अनदेखी
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल में ना तो मरम्मत कराई गई और ना ही कोई नया भवन बनाने की योजना सामने आई। सरकारी फाइलों में शायद सब कुछ ठीक है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बहुत दर्दनाक है।
शिक्षा का हक छिन रहा है सरकार जहां हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने की बात करती है, वहीं कटनी का यह स्कूल उन वादों की सच्चाई खोल कर रख देता है। इस तरह की लापरवाही से बच्चों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है। गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह स्कूल ही एकमात्र उम्मीद था, लेकिन अब वहाँ पढ़ना उनकी जान को खतरे में डालने जैसा है।
कटनी का यह मामला सिर्फ एक स्कूल की बदहाली नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता को दिखाता है। अगर समय रहते प्रशासन जागा नहीं, तो ये जर्जर स्कूल किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बच्चों का भविष्य और उनकी जान दोनों दांव पर हैं। अब ज़रूरत है ठोस कदम उठाने की, न कि सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति की।
