रोहित रजक, भोपाल। भोपाल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-छोटी बीमारियों में बार-बार दवाएं लेते हैं, खासकर दर्द की दवाएं। इसके अलावा शराब की लत भी तेजी से बढ़ रही है। इन दोनों कारणों से लिवर पर सीधा असर होता है। लिवर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है और कई बार यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
हेपेटाइटिस क्या है ?
हेपेटाइटिस एक खतरनाक वायरस जनित बीमारी है, जो लिवर को नुकसान पहुंचाती है। यह पांच प्रकार की होती है – हेपेटाइटिस A, B, C, D और E। इनमें हेपेटाइटिस B और C सबसे खतरनाक मानी जाती हैं क्योंकि ये लंबे समय तक बिना लक्षण के शरीर में पनपती रहती हैं और लिवर सिरोसिस या कैंसर का कारण बन सकती हैं।
फैलने के कारण
विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस A और E आमतौर पर दूषित पानी और गंदे खाने से फैलते हैं, जबकि B और C संक्रमित खून, इंजेक्शन, रेज़र या असुरक्षित यौन संबंध से फैलते हैं।आज भी कई लोग बिना जांच के खून चढ़वाते हैं या बिना सुरक्षित तरीकों के सुइयों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह संक्रमण तेजी से फैलता है।
शराब और दवाओं का असर
लंबे समय तक शराब पीने से लिवर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। इसी तरह बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स और ऐंटीबायोटिक्स लेने से भी लिवर पर सीधा असर पड़ता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि बार-बार पेनकिलर लेना लिवर को धीरे-धीरे खराब कर देता है और व्यक्ति को इसका पता भी नहीं चलता।
बच्चों को दी गई जागरूकता
इस अवसर पर भोपाल के एक स्कूल में बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें छात्रों को साफ-सफाई, हाथ धोने की आदत, साफ पानी पीने और पौष्टिक भोजन खाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही CPR (हृदय पुनर्जीवन प्रक्रिया) और प्राथमिक उपचार की जानकारी भी दी गई। इससे बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे घर व समाज में भी इसका संदेश देंगे।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज
विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस बी का टीका उपलब्ध है, जिसे लगवाकर बीमारी से बचा जा सकता है। इसके अलावा साफ-सफाई का ध्यान रखना, दूषित खाना और पानी न लेना, संक्रमित चीजों के संपर्क से बचना, और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है।
सरकार और समाज की भूमिका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की कि गांव-गांव और शहरी इलाकों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्कूलों, अस्पतालों और पंचायत स्तर पर लिवर जांच शिविर लगाए जाएं ताकि बीमारी की पहचान समय रहते हो सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
