रानू यादव। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक बेहद डरावना ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां लोग आत्महत्या करने से पहले अपने वीडियो रिकॉर्ड कर पोस्ट कर रहे हैं। यह एक गंभीर समस्या बन गई है और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जोर देकर कहा है कि इसे तुरंत रुकना चाहिए।

इससे जुड़े कुछ मामले!

2018 में आगरा में एक शख्स ने फेसबुक लाइव पर आत्महत्या की थी। यह उन शुरुआती और चर्चित मामलों में से एक था, जिसने सोशल मीडिया पर लाइव सुसाइड के खतरे को उजागर किया। हाल ही में अतुल सुभाष जैसे कुछ मामले सामने आए हैं, जहाँ लोगों ने सुसाइड से पहले लंबे वीडियो और सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं। ये मामले मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया की भूमिका पर चिंता बढ़ा रहे हैं।

मार्च 2025 में आगरा में टीसीएस मैनेजर के सुसाइड का मामला भी सामने आया, जिसमें उसने लाइव वीडियो बनाया था।
ऐसे कई मामले देखने को मिले जिसमें वीडियो शेयर कर सुसाइड को अंजाम दिया गया। इस विषय पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है। यह हमारे समाज के लिए काफी खतरनाक ट्रेंड में से एक माना जा सकता है।

क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

अटेंशन की चाहत: कुछ मामलों में, व्यक्ति अंतिम क्षणों में ध्यान आकर्षित करने या अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए ऐसा करते हैं।

सामाजिक अलगाव: अकेलापन और सामाजिक समर्थन की कमी लोगों को ऐसे चरम कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जहां उन्हें लगता है कि सोशल मीडिया ही उनकी बात सुनने का एकमात्र मंच है।

नकल का खतरा: एक बार जब ऐसे वीडियो सामने आते हैं, तो वे कमजोर व्यक्तियों के लिए एक ‘नकल प्रभाव’ (copycat effect) पैदा कर सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं: अवसाद, चिंता, और अन्य गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं ऐसे व्यवहार की जड़ में होती हैं।जब इन समस्याओं का इलाज नहीं होता, तो व्यक्ति निराशा के गर्त में जा सकते हैं।

तत्काल पहुंच: स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान पहुंच ने ऐसे वीडियो बनाना और उन्हें तुरंत साझा करना संभव बना दिया है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड बेहद खतरनाक है और इसे रोकने के लिए तत्काल उपाय की आवश्यकता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने और रिपोर्ट करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने चाहिए। उन्हें ऐसे वीडियो को फैलने से रोकने के लिए तत्परता दिखाना होगा।

जागरूकता बढ़ाना: लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षणों और सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है।

सहयोग और समर्थन: समाज में एक ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जहां लोग बिना किसी झिझक के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और उन्हें पर्याप्त समर्थन मिल सके।परिवार, दोस्त और समुदाय की भूमिका इसमें बहुत महत्वपूर्ण है।

पॉजिटिव कंटेंट को बढ़ावा: सोशल मीडिया पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सकारात्मक और प्रेरणादायक कंटेंट को बढ़ावा देना चाहिए ताकि लोगों को मदद मिल सके।

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