रानू यादव : पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में पैरा कमांडो हाशिम मूसा उर्फ शाह सुलेमान को ऑपरेशन महादेव में ढेर कर दिया गया है।य ह एक हाईली ट्रेंड आतंकी था, पहलगाम हमले से पहले भी उसने कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया था।
हाशिम मूसा कौन था?
हाशिम मूसा, जिसे सुलैमान शाह मूसा फौजी भी कहा जाता था, लश्कर-ए-तैयबा का एक खतरनाक कमांडर और पहलगाम हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था। वह पहले पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पैरा-कमांडो रह चुका था। अज्ञात कारणों से सेना से निकाले जाने के बाद, वह लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने लगा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसने सितंबर 2023 में भारत में घुसपैठ की और दक्षिण कश्मीर में अपने आतंकी अभियानों को फिर से शुरू किया। मूसा अपनी सैन्य ट्रेनिंग, ट्रैप-सेटिंग और शार्पशूटर तकनीकों के लिए जाना जाता था। उसका नेटवर्क घाटी में कई जगह फैला था और वह कम से कम छह आतंकी हमलों में शामिल रह चुका था, जिनमें सोनमर्ग टनल हमला और पहलगाम हमला प्रमुख हैं। NIA ने उस पर 20 लाख रुपये का इनाम भी रखा था।
पहलगाम हमला
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम के पास बैसरन घाटी में एक जघन्य आतंकवादी हमला हुआ था। पांच आतंकियों ने सैन्य शैली की वर्दी में आकर 26 पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें उनकी मौत हो गई और 17 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे, हालांकि एक ईसाई पर्यटक और एक स्थानीय मुस्लिम भी मारे गए। इस हमले में M4 कार्बाइन और AK-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का हाथ माना जाता था, और हाशिम मूसा को इस हमले के ऑन-ग्राउंड ऑपरेशंस की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सोनमर्ग टनल पर भी किया था हमला?
सोनमर्ग में Z-मोर्ह टनल के पास 20 अक्टूबर 2024 को एक आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में सात लोग मारे गए थे, जिनमें छह मजदूर और एक डॉक्टर शामिल थे। इस हमले के पीछे भी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों का हाथ था। हाल ही में,इस सोनमर्ग टनल हमले का भी जिम्मेदार माना गया है। लश्कर का कमांडर जुनैद अहमद भट्ट का नाम भी इस हमले से जुड़ा था।
यह हमला रात करीब 7:30-8:00 बजे हुआ था, जब आतंकी मजदूरों के कैंप में घुस गए और उन पर गोलीबारी की। यह टनल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और लद्दाख क्षेत्र को पूरे साल सड़क मार्ग से जोड़ने में मदद करती है, जिससे सेना के लिए भी यह बेहद अहम है।
‘ऑपरेशन महादेव’ और हाशिम मूसा का खात्मा
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों की तलाश तेज कर दी थी। ‘ऑपरेशन महादेव’ इसी के लिए शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन 28 जुलाई, 2025 को श्रीनगर के लिडवास इलाके में शुरू हुआ। सेना को ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और खुफिया जानकारी के जरिए हाशिम मूसा की सटीक लोकेशन मिली।
कैसे पूरा हुआ ऑपरेशन महादेव?
सुबह करीब 11 बजे, जब सेना की एरिया डोमिनेशन पार्टी नियमित गश्त पर थी, तो उन्हें तीन संदिग्ध आतंकी दिखाई दिए। इसके बाद तुरंत मुठभेड़ शुरू हो गई। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और भारतीय सेना की 12 सिख लाइट इन्फैंट्री इस ऑपरेशन में शामिल थीं। लगभग 6 घंटे तक चली इस मुठभेड़ में हाशिम मूसा सहित तीन आतंकी मारे गए। मुठभेड़ स्थल से AK-47, ग्रेनेड और IED (बम) बरामद किए गए। हाशिम मूसा के पास से एक पाकिस्तानी पासपोर्ट और सैटेलाइट फोन भी मिला, जो उसकी ISI से संपर्क होने का संकेत देता है।
ऑपरेशन का महत्व
‘ऑपरेशन महादेव’ पहलगाम हमले के 96 दिनों बाद आतंकियों के लिए एक करारा जवाब था। हाशिम मूसा जैसे खतरनाक आतंकी का सफाया देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत मानी जा सकती है। इस ऑपरेशन ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्कों पर एक बड़ा प्रहार किया है।
