कामना कासोटिया, भोपाल: हरिद्वार: मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से हड़कंप, 6 की मौत, 29 घायलहरिद्वार, 27 जुलाई: हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह लगभग 9:15 बजे मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर अचानक भगदड़ मच गई। इस घटना में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 29 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
हादसे के बाद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में हड़कंप फैल गया।यह हादसा मंदिर के उस रास्ते पर हुआ जो श्रद्धालु सीढ़ियों से चढ़कर मंदिर तक पहुँचने के लिए इस्तेमाल करते हैं। चश्मदीदों के अनुसार, सीढ़ियों पर अचानक भीड़ ज्यादा हो गई और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और भगदड़ मच गई।
कुछ लोगों ने दावा किया कि तार में करंट आने की अफवाह फैल गई थी, जिससे डर के मारे लोग इधर-उधर भागने लगे। हालांकि पुलिस प्रशासन ने इस बात से साफ इनकार किया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि करंट जैसी कोई बात नहीं थी, यह केवल एक अफवाह थी, लेकिन इसी अफवाह ने माहौल को और बिगाड़ दिया।
कैसे हुआ हादसा?
रविवार को मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी थी। सावन का पवित्र महीना चल रहा है और सप्ताहांत होने की वजह से दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचे थे। मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, और वहाँ तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 800 मीटर लंबी सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। सुबह के समय जब भीड़ सबसे ज्यादा थी, तभी यह हादसा हुआ। श्रद्धालु सीढ़ियों पर चढ़ रहे थे, तभी अचानक कुछ लोग तेज़ी से नीचे उतरने लगे। अफवाह फैली कि ऊपर बिजली के तार में करंट है, जिससे घबराकर लोग भागने लगे और इसी दौरान भगदड़ मच गई।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल हादसे के बाद स्थानीय लोग और श्रद्धालु प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर उचित व्यवस्था नहीं की गई थी। न तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी मौजूद थे और न ही कोई मेडिकल सुविधा पास में थी।घायलों को तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों की पहचान की जा रही है और उनके परिवारों को सूचना दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही प्रशासन को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे हर स्थिति के लिए पूरी तैयारी रखें। यह हादसा एक बड़ी सीख है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए ताकि भविष्य में किसी की जान न जाए।
