रिपोर्ट, काजल जाटव: उज्जैन की पैरा खिलाड़ी चार्वी ने वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया। रजत पदक जीतकर उन्होंने भारत का मान बढ़ाया। गोवा में हुई इंटरनेशनल टूर्नामेंट में उज्जैन की चार्वी ने अपना दम दिखाया और सिल्वर मेडल जीतकर दुनियाभर में भारत का नाम रोशन किया। वह इस प्रतिस्पर्धा में दूसरी सबसे अच्छी खिलाड़ी बन गई, जो उनका और पूरे देश का गर्व है।

यह उनकी कड़ी मेहनत, लगन और अनुशासन का ही नतीजा है। सिर्फ 10 साल की उम्र में, चार्वी ने शतरंज की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था और उसमें माहिर हो गई। उनकी चतुराई, विरोधियों की चालों का सही अंदाजा लगाना, और दबाव में भी शांत रहना, इन्हीं बातों ने उन्हे इस मुकाम तक पहुंचाया है। 

टूर्नामेंट का आयोजन 

इस साल की वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप गोवा में हुई, जिसमें दुनिया के कई टॉप खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न उम्र के मुकाबलों में भारत से कई खिलाड़ी पहुंचे, लेकिन चार्वी का प्रदर्शन सबसे अलग रहा। उन्होंने कठिन मुकाबलों में जीत हासिल की और फाइनल तक पहुंची, जहां चार्वी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। मध्यप्रदेश के उज्जैन में रहने वाली चार्वी ने न सिर्फ अपने प्रदेश का नाम किया, बल्कि पूरे भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

24वीं वर्ल्ड इंडिविजुअल शतरंज चैंपियनशिप 2025 के लिए, भारतीय खेल प्राधिकरण, सरकार और शतरंज फेडरेशन ने एक 8 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है। इस टीम में उज्जैन की चार्वी मेहता ने जगह बनाई है, जो अब भारतीय टीम का हिस्सा होंगी। इस चैम्पियनशिप में भारत से 4 महिलाएं और 4 पुरुष खिलाड़ी भाग लेंगे, और उसके अलावा, B कैटेगरी में 8 महिला और 8 पुरुष खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह आयोजन 21 जुलाई से 30 जुलाई तक गोवा के इंटरनेशनल सेंटर, डोना-पाला में होगा। महिला टीम A कैटेगरी के लिए, मध्य प्रदेश की चार्वी मेहता के साथ-साथ तमिलनाडु की शेरोंन रचेल अभय, कनिश्री पी और तेलंगाना की खदीजा फातेमा को भी चुना गया है।

किया देश का नाम रोशन 

पहले भी कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने जीत दर्ज की थी, लेकिन विश्व मंच पर मिली इस बड़ी सफलता ने उनकी प्रतिभा को नई पहचान दी है। अब चार्वी ने अपनी इस जीत के बाद भविष्य की योजनाएँ तय कर ली हैं। वह आगे भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरने का मन बना चुकी है और अगला गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद रखती है। उनके कोच का मानना है कि यदि चार्वी इसी तरह मेहनत करती रही, तो जल्द ही वह भारत की सबसे कम उम्र की ग्रैंड मास्टर बन सकती हैं। इस जीत ने ना सिर्फ उनके लिए बल्कि भारतीय युवा प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणा का काम किया है। 

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