कामना कासोटिया, भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत 28 जुलाई से हो रही है, लेकिन उससे पहले ही एक बड़ा फैसला चर्चा में आ गया है। विधानसभा सचिवालय ने सभी मंत्रियों और विधायकों को एक पत्र भेजा है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विधानसभा परिसर में अब कोई भी नारेबाजी और प्रदर्शन नहीं कर सकेगा।
यह पहला मौका है जब विधानसभा परिसर में इस तरह की रोक लगाई गई है। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार विधायकों के मुंह पर ताला नहीं लगा सकती।
क्या है आदेश में?
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान कोई भी विधायक विधानसभा परिसर के भीतर किसी भी तरह की नारेबाजी या प्रदर्शन नहीं कर पाएगा। यह आदेश सभी राजनीतिक दलों के विधायकों और मंत्रियों को भेजा गया है। सचिवालय ने यह कदम विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए उठाया है।
विपक्ष ने जताई नाराज़गी
इस फैसले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार डरी हुई है और इसलिए विधायकों की अभिव्यक्ति की आज़ादी को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, और वहां अगर जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने भी नहीं दिया जाएगा, तो यह लोकतंत्र का मजाक है।
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन इस आदेश के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में एकजुट होकर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने हाथों में तख्तियां लीं और सरकार विरोधी नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को ‘तानाशाही’ करार दिया और कहा कि वे जनता की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सरकार की सफाई
सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बताया जा रहा है सचिवालय का उद्देश्य केवल यह है कि सदन की कार्यवाही शांतिपूर्वक चले और परिसर में अनुशासन बना रहे। सचिवालय का मानना है कि विरोध और प्रदर्शन के लिए दूसरे मंच होते हैं, न कि विधानसभा परिसर।
राजनीतिक हलकों में चर्चा इस आदेश को लेकर पूरे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं ने भी कहा कि अगर विधायकों की आवाज दबाई जाएगी, तो यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही नहीं होगा।जनता की नजरें मानसून सत्र पर अब सभी की निगाहें 28 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को सदन में जोरशोर से उठाता है और क्या सरकार इस पर कोई सफाई देती है।

