रंजन भगत : भारत के संविधान के अनुछेद 21 ए के तहत 14 साल के कम सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार है….सरकार बच्चों को शिक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास भी कर रही है..लेकिन कुछ अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य अंधेरे में है…राजधानी भोपाल में एक ऐसा भी शासकीय स्कूल है… जो शेड के नीचे चल रहा है…ये स्कूल भोपाल के पॉश इलाके जवाहर चौक में चल रहा है…यानी राजधानी में बच्चे शेड के नीचे पढ़ रहे हैं…स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्कूल भवन तो तोड़ दिया गया, 5 साल पहले स्मार्ट स्कूल ,स्मार्ट क्लास बनाकर देने का वादा किया गया लेकिन आज तक बच्चों को कोई सुविधा नहीं दी गई. बच्चें गर्मी और बारिशों में शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर है….

शासकीय कस्तूरबा कन्या विद्यालय नॉर्थ टीटी नगर में स्थित है …जहां पर छात्राएं शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर है …यानी आप समझ सकते हैं कि अगर गर्मी पड़ रही है तो किस तरह से बच्चे पढ़ेंगे…और अगर बारिश हो रही है तो शेड से जो शोर होगा उससे कैसे पढ़ाई होगी… बगल से सड़क गई है…और बाउंड्री वॉल भी स्मार्ट सिटी के कारण तोड़ दी गई है …स्कूल की एक और बिल्डिंग है… जिसमें क्लासेस भी चलती हैं …और ऑफिस भी चलता है …एक तरफ बच्चियों को पढ़ाने और बढ़ाने की बात हो रही… दूसरी ओर ऐसे स्कूल है जहां दुर्दशा के बीच बच्चियां पढ़ने को मजबूर है… स्कूल के अंदर टेबल कुर्सी भी नहीं है… बच्चियों जमीन में टाट पट्टी बिछाकर पढ़ाई कर रही हैं… यानी AC के कमरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारी शेड के स्कूल में बच्चियों का भविष्य बर्बाद करने में लगे है…

5 सालों से बच्चे टीन शेड में पढ़ने को मजबूर ,जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
बच्चों की भविष्य की चिंता करते हुए शिक्षकों ने कई जगहों पर इसकी शिकायत और आवेदन भी दिया है….लेकिन कई बार आवेदन देने के बावजूद न तो स्मार्ट सिटी और न विभाग के अधिकारी को इस स्कूल की व्यवस्था की चिंता है… अब आप स्कूल की स्थिति देखकर समझ गए होंगे की बच्चियों का भविष्य किस तरह गर्त में है ….प्राचार्य की माने तो जर्जर हालत और शेड की वजह से बच्चों के पेरेंट्स बच्चियों को स्कूल से निकल रहे हैं..लगातार हर वर्ष यहां पर बच्चियों की संख्या घटती जा रही है… 5 सालों से शिक्षक गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही और जिम्मेदार लापरवाह है….

स्मार्ट सिटी के सपनों में दब गई बेटियों की पढ़ाई!
शासकीय स्कूल में पढ़ रहे इन बच्चों के भविष्य की चिंता किसी को नहीं सभी एक- दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे है.. अगर व्यवस्थाएं तंदुरुस्त नहीं होगी तो बच्चे स्कूल में कैसे पढ़ेंगे… खास तौर पर जब इस तरह के स्कूल हो जो शेड के नीचे चल रहे हो… राजधानी भोपाल के बीचों बीच स्थित इस शासकीय स्कूल का ये हाल है तो बाकी जगह क्या दुर्दशा होगी… अधिकारियों को जनप्रतिनिधि का डर भी नहीं… यानी ये जिम्मेदार अधिकारी सरकार की योजनाओं को मट्टी पलीद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है…
