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रामबाग के नाम पर विवाद गहराया, नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा – जनता की भावनाओं का हो अपमान, नगर निगम अध्यक्ष ने दिखाई तानाशाही


रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल। नगर निगम परिषद की बैठक में उस समय भारी हंगामा हो गया जब ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर ‘रामबाग’ रखने का प्रस्ताव सामने आया।

कांग्रेस पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया और बैठक में जमकर नारेबाजी हुई। मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई और बैठक को 15 मिनट के अंदर ही स्थगित करना पड़ा।

बैठक में कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने साफ शब्दों में कहा कि बीजेपी सरकार और नगर निगम अध्यक्ष जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं।

“अशोका गार्डन एक ऐतिहासिक नाम है और इसे बदलना जनता की भावना के खिलाफ है। यह फैसला पूरी तरह से मनमाना और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है,” उन्होंने कहा।


नाम बदलने पर विपक्ष का विरोध

बैठक में जैसे ही ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलने की घोषणा हुई, विपक्ष के पार्षद अपनी कुर्सियों से उठकर विरोध करने लगे।


बीजेपी का पक्ष

वहीं, नगर निगम अध्यक्ष और बीजेपी पार्षदों का कहना है कि रामबाग नाम रखना “संस्कृति और परंपरा” से जुड़ा फैसला है। उनका कहना था कि “राम हमारे आदर्श हैं और स्थानों को धार्मिक आधार पर नाम देना गलत नहीं है।”

बीजेपी पार्षदों ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के चलते इस फैसले का विरोध कर रही है।


बैठक में दिखा भारी हंगामा

जैसे ही अध्यक्ष ने नाम बदलने की मंजूरी दी, विपक्षी पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। “तानाशाही नहीं चलेगी”, “जनता का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारे गूंजने लगे। माहौल गरम होते देख अध्यक्ष ने 15 मिनट के भीतर बैठक स्थगित कर दी और कुछ प्रस्ताव बिना चर्चा के पास कर दिए, जिससे कांग्रेस और भड़क गई।


नेता प्रतिपक्ष का बयान – “जनता के सवालों से भाग रही है सरकार”

शबिस्ता जकी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह सरकार जवाबदेही से भाग रही है। जनता पानी, सफाई और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, और नगर निगम को नाम बदलने की राजनीति सूझ रही है। यह मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “नगर निगम अध्यक्ष एकपक्षीय फैसले ले रहे हैं, पार्षदों की बात सुनी ही नहीं जा रही। इससे साफ है कि परिषद में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।”


भोपाल चुनाव को साधने की कोशिश ?

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी इस नामकरण की राजनीति के जरिए आगामी भोपाल नगर निगम चुनाव में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है। विपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो जनता के बीच जाकर इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।


जनता से जुड़ी समस्याएं अनदेखी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि परिषद की बैठक में असली मुद्दे गायब हैं – जैसे:

कॉलोनियों में नाली और सड़क की जर्जर हालत

गर्मी में पीने के पानी की किल्लत

सफाई व्यवस्था की बदहाली

सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या

उन्होंने कहा, “इन मुद्दों पर चर्चा के बजाय नाम बदलने जैसे बेमतलब प्रस्ताव लाकर जनता के साथ धोखा किया जा रहा है।”


पार्षदों की भी नहीं हो रही सुनवाई

कांग्रेस के पार्षदों ने बताया कि पिछले तीन महीनों से वे अपने वार्ड की समस्याओं के लिए प्रस्ताव लाकर रख रहे हैं लेकिन अध्यक्ष उन्हें एजेंडे में ही नहीं लाते। वहीं बीजेपी पार्षदों के प्रस्ताव झट से पारित हो जाते हैं। यह दोहरी नीति नहीं तो और क्या है?


लोकतंत्र की जगह तानाशाही

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम परिषद में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। जनता से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हो रही है, और बिना चर्चा के नाम बदलने जैसे विवादास्पद फैसले लिए जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने स्पष्ट रूप से जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए विरोध दर्ज कराया और नगर निगम अध्यक्ष के तानाशाही व्यवहार को उजागर किया। वहीं नगर निगम अध्यक्ष और बीजेपी पार्षद जनता की राय लिए बिना मनमाने फैसले लेते नजर आए।


नगर निगम परिषद की बैठक नाम बदलने की राजनीति में उलझ गई, जबकि जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। कांग्रेस नेता शबिस्ता जकी ने विपक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए जनता की आवाज बुलंद की, लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपनाया।

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