रोहित रजक: भोपाल। महिला निजता पर हमला आपरेशन सिंदूर एक खुफिया खुलासा है, जिसमें दावा किया गया है कि देश की कई महिलाओं की निजी जानकारी और गतिविधियों पर निगरानी रखी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों से कुछ महिलाओं को टारगेट किया गया और उनकी गतिविधियों की पूरी डिटेल सरकार समर्थित एजेंसियों तक पहुंचाई गई।

इस ऑपरेशन को “सिंदूर” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह खासतौर पर विवाहित महिलाओं को निशाना बनाने का दावा करता है। इसके तहत न सिर्फ महिलाओं की निगरानी की गई, बल्कि उनके रिश्तों, राजनीतिक विचारों और संपर्कों का विश्लेषण भी किया गया।

विपक्ष का आरोप – “महिलाओं की जासूसी और गरिमा का अपमान”कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीएमसी, डीएमके जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए न सिर्फ महिलाओं की निजी जिंदगी में दखल दिया गया, बल्कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा:

“यह सिर्फ महिलाओं पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी गरिमा पर हमला है। सरकार को जवाब देना होगा।”टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस ऑपरेशन की तुलना ‘डिजिटल सर्विलांस’ से की और इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ बताया, जो ‘निजता के अधिकार’ की गारंटी देता है।

संसद में क्या हो रहा है ?

इस मुद्दे को लेकर संसद में लगातार तीन दिन से भारी हंगामा चल रहा है। विपक्षी सांसदों ने सरकार से तुरंत बहस की मांग की, लेकिन सरकार शुरू में तैयार नहीं थी। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित रही और कई बार स्थगित करनी पड़ी।

अब सरकार ने विपक्ष की मांग मानते हुए दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दी है। चर्चा की तारीखें:लोकसभा में 28 जुलाई को बहसराज्यसभा में 29 जुलाई को चर्चा हर सदन में 16-16 घंटे की बहस का समय तय किया गया है, जिसमें पक्ष और विपक्ष के सांसद अपनी बात रख सकेंगे।

क्या कह रही है सरकार ?

सरकार की तरफ से अभी तक ऑपरेशन सिंदूर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि केंद्र इसे एक “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” मानता है। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि ये सिर्फ विपक्ष की चुनावी रणनीति है और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

हालांकि, सरकार संसद में इस मुद्दे पर खुलकर जवाब देने को तैयार है। उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी भी जोरों पर इसी बीच संसद के भीतर एक और बड़ा घटनाक्रम हो रहा है। मौजूदा उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और अगस्त के आखिरी हफ्ते में नया उपराष्ट्रपति चुना जाएगा।

चुनाव आयोग की तैयारियां:

नामांकन प्रक्रिया जल्द होगी शुरू वोटिंग के लिए ईवीएम और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सांसद करेंगे मतदान 50% से ज्यादा वोट पाने वाला बनेगा उपराष्ट्रपति लोकसभा में पेश हुआ राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक संसद में बुधवार को राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 भी पेश किया गया।

इसका उद्देश्य देश में खेल संघों की पारदर्शिता बढ़ाना और खिलाड़ियों के अधिकार सुरक्षित करना है। मुख्य विषयसभी खेल संघों को पंजीकृत होना अनिवार्य खिलाड़ी शिकायत निवारण आयोग की स्थापना खेल अधिकारियों की जवाबदेही तय भ्रष्टाचार पर सख्त सजा के प्रावधान।

आने वाले दिन क्यों हैं अहम ?

अब सबकी निगाहें 28 और 29 जुलाई की बहस पर टिकी हैं। यदि संसद में विपक्ष के सवालों का ठोस जवाब नहीं मिला, तो यह मुद्दा और भी गरमाएगा। साथ ही, यह चर्चा महिलाओं की सुरक्षा, निजता और डिजिटल निगरानी जैसे अहम विषयों पर देशभर में नई बहस को जन्म दे सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि यह सवाल है कि क्या देश में महिलाओं की निजता सुरक्षित है? क्या सरकार की एजेंसियां निजी जीवन में दखल दे रही हैं? क्या राजनीति के लिए आम नागरिकों की आज़ादी खतरे में है? इन सवालों के जवाब संसद में तय होंगे — और इस बार पूरा देश देख रहा है।

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