रिपोर्ट काजल जाटव: 21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को स्वीकार कर लिया। इसके बाद गृह मंत्रालय ने 22 जुलाई को एक आधिकारिक राजपत्र (S.O. 3354(E)) जारी कर इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया और पद रिक्त हो गया। चुनाव आयोग ने तुरंत प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324, ‘राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952’ और नियमावली 1974 के आधार पर सभी तैयारी कर ली है।
चुनाव आयोग ने प्रक्रिया शुरू की
अब सभी लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, जिनमें से कुछ निर्वाचित और कुछ मनोनीत हैं, एक मतदाता मंडल बना रहे हैं, और रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। पिछली चुनाव प्रक्रिया से सीख लेकर एक कार्य योजना तैयार की गई है। संवैधानिक तौर पर, चुनाव जल्द से जल्द कराने की जरूरत है, लेकिन कानूनी तौर पर इसे छह महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।
सूत्रों का कहना है कि निर्वाचन आयोग 48 से 72 घंटों में चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा और पूरी प्रक्रिया 32 दिनों में पूरी हो सकती है। इस तरह, नए उपराष्ट्रपति का पद अगस्त के अंतिम सप्ताह तक संभालने की संभावना है। जहां तक इंटरिम व्यवस्था का सवाल है, उपराष्ट्रपति पद खाली होने से राज्यसभा के अध्यक्ष का पद भी खाली हो गया है। अब उपाध्यक्ष ने इस्तीफे तक अध्यक्ष का काम किया था, और वर्तमान में डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
चुनाव कैसे होगा?
इसमें सिर्फ संसद के निर्वाचित और नामित सदस्य ही भाग लेंगे। मतदान गुप्त मतपद प्रणाली और ट्रांसफरेबल वोटिंग (STV) से होगा, जिसमें मतदाता अपनी वरीयता रैंकिंग करते हैं। वोट जीतने के लिए quota जरूरी है, यदि कोई उम्मीदवार यह संख्या नहीं पा सका, तो उसे हटा दिया जाएगा और वोट दूसरे पसंद के उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। राजनीतिक दौर में अभी तक किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है, लेकिन चर्चा में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार, जम्मू-कश्मीर के एल जी मनोज सिन्हा, दिल्ली के एल जी वी.के. सक्सेना, और वर्तमान डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
संभावित उम्मीदवार और राजनितिक संकेत
भाजपा/एनडीए जल्द ही अपनी तैयारी करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक के बाद अंतिम नाम तय किया जाएगा। इन सभी राजनीतिक उठापटक के बीच, कुछ लोग इस्तीफ़े को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हैं, वहीं राजस्थान कांग्रेस के अशोक गहलोत ने इसे राजनीतिक दबाव करार दिया है। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य का हवाला तो सही नहीं लग रहा है… कुछ तो जरूर पीछे छुपा है।”
इस पूरे घटनाक्रम में, उपराष्ट्रपति की जगह खाली होते ही संसद संचालन में भी बड़ा बदलाव आएगा। जल्द ही नई रिक्ति के लिए मतदान शुरू होगा, और प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभव है कि अगस्त के अंत तक नया उपराष्ट्रपति पद संभाल लिया जाए। अब सारी नजरें चुनाव प्रक्रिया, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के फैसलों पर टिकी हैं।
