राजधानी भोपाल में परपीड़ा संस्था गरीब प्रतिभाशाली छात्रों को पुराने लैपटॉप और मोबाइल फोन फ्री में देने का काम कर रही है. ताकि वे अपना भविष्य प्रबल बना सकें. संस्था के अध्यक्ष 82 वर्षीय राधेश्याम होनहार विद्यार्थियों की स्कूल फीस, राशन वितरण और जरुरतमंदों को सामान दिलाकर उनकी मदद करते हैं. परपीड़ा संस्था के अध्यक्ष राधेश्याम साबू ने बताया कि गरीब बच्चे गैजेट नहीं खरीद पाते उनके पास फाइनेंशियल प्रॉब्लम ज्यादा होती है. जिससे पढ़ाई करने में परेशानी होती है. ऐसे में हमने मुहिम चलाकर लोगों के घरों में बेकार पड़े लैपटॉप, मोबाइल सहित अन्य गैजेट जुटाकर बच्चों को देते हैं, ताकि वे आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर पढ़ाई कर सके और अपना उज्जवल भविष्य बना सकें. अभी तक एक साल में हम 20 से ज्यादा छात्रों को लैपटॉप, फोन दे चुके हैं.

शुरुआत चुनौती भरी थी, लेकिन कारवां जुड़ता चला गया. जनसहयोग से एमवाय, एमटीएच अस्पताल सहित भोपाल के सरकारी अस्पतालों में दान की राशि से लाखों रूपए के उपकरण दिए. 82 साल के साबू आज भी सेवा में जुटे रहते हैं. संस्था होनहार विद्यार्थियों की स्कूल फीस, पर्वों पर बस्तियों में राशन वितरण भी करती है. कार्य को देखकर 7000 दानदाता संस्था में शामिल हो गए है. संस्था के पास करीब सात हजार दानदाता हैं, जो अलग-अलग तरह से मदद करते हैं. इनमें उद्योगपति, रिटायर्ड अधिकारी, शिक्षक, इंजीनियर आदि शामिल हैं. इसके साथ ही इंदौर व भोपाल में करीब 40 स्वयंसेवक सक्रिय हैं. मरीजों को महंगी दवा और इंजेक्शन उपलब्ध करवाना, समस्त प्रकार की जांचें मुफ्त करवाना, जरूरतमंदों के लिए रक्त संबंधित जरूरत की पूर्ति, पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाना, मुफ्त गर्म और मीठा दूध वितरण, मुफ्त चश्मे उपलब्ध करवाना, जीवन रक्षक उपकरण और आपरेशन में लगने वाली सामग्री देना, स्वेटर और कंबल वितरण, मरीज को घर भिजवाना,‌ जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध करवाना

By Pulkit Trigun

स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट, जिनकी खेलों के प्रति गहरी लगन है, खासकर क्रिकेट के लिए। पिछले दो सालों से खेल पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए क्रिकेट, फुटबॉल से लेकर स्थानीय टूर्नामेंट तक कई अहम इवेंट कवर किए हैं। मक़सद सिर्फ़ स्कोर और आँकड़े बताना नहीं, बल्कि खेल की कहानियों, जज़्बात और रोमांच को पाठकों तक पहुँचाना है।

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