काजल जाटव: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बहुत ही भावुक और सम्मानजनक पत्र के जरिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत दिया है, और बताया है कि वो स्वास्थ्य संबंधी कारणों की वजह से तुरंत ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं। उनका यह फैसला न सिर्फ संवैधानिक नियमों का सम्मान करता है, बल्कि उनकी सेवा और जिम्मेदारीपूर्ण रवैये को भी दर्शाता है। ANI ने अपने ट्विट के ज़रिये उनके स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पद छोड़ने की पुष्टि की है।

सम्मान और सहयोग के प्रति कृतज्ञता

अपने पत्र में उन्होंने सबसे पहले महामहिम राष्ट्रपति का बहुत धन्यवाद किया। उन्होंने उनके राष्ट्रपति के साथ काम करने के अनुभव को बहुत ही सुखद और अद्भुत बताया साथ ही उनके साथ लगातार मिलकर काम करने की सराहना की। ये दोनों पदों के बीच का तालमेल देश के लिए मिसाल है। 

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को धन्यवाद

धनखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का भी धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन और समर्थन उनके लिए बेहद अनमोल रहा, और उन्होंने इसमें बहुत कुछ सीखने का मौका पाया। यह बात उनके विनम्र स्वभाव और सीखने की चाह दिखाती है। पूर्व उपराष्ट्रपति ने सभी सांसदों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनका सहयोग किया, भरोसा किया और प्यार दिखाया। 

संसद, खासकर राज्यसभा की अध्यक्षता करते हुए, उनके सामने कई चुनौतियां आई, लेकिन उन्होंने धैर्य, गरिमा और समझदारी से काम लिया, जिसे हर कोई खूब सराह रहा है। धनखड़ ने अपने पत्र में भारत की तेज़ी से बढ़ रही आर्थिक और तकनीकी प्रगति का जिक्र कर गर्व महसूस किया। उन्होंने लिखा कि इस बदलाव के दौरान भी, उपराष्ट्रपति का पद निभाना उनके लिए बहुत गर्व और संतोष की बात रही है। ये उनके देशभक्ति और दूरदृष्टि को दर्शाता है। उन्हें भारत की ग्लोबल उन्नति और उज्ज्वल भविष्य को लेकर बहुत उम्मीद है।

पत्र को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि “इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ते हुए, मैं भारत की वैश्विक उन्नति और अभूतपूर्व उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहा हूँ तथा उसके उज्ज्वल भविष्य के प्रति अटूट विश्वास रखता हूँ।”

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