रोहित रजक: भोपाल। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग फॉर इनोवेशन 2025 में भोपाल एम्स ने 34वां स्थान प्राप्त किया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय संस्थान ने इस तरह की वैश्विक रैंकिंग में इनोवेशन श्रेणी में इतनी ऊंची जगह बनाई है।
शोध, शिक्षा और नवाचार का परिणाम:
एम्स भोपाल को यह रैंकिंग उसके शोध कार्य, शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार प्रयासों के कारण मिली है।
रैंकिंग प्रक्रिया:
यह रैंकिंग स्विट्जरलैंड की संस्था “रिच इंस्टिट्यूट फॉर पॉलिसी एंड स्ट्रैटेजी” और “नेशनल कंपटीटिवनेस सेंटर” द्वारा की जाती है।
डेटा और प्रमाण आधारित मूल्यांकन:
रैंकिंग में केवल अकादमिक प्रकाशन या शोध को नहीं, बल्कि डेटा, परिणामों और संस्थानों के सामाजिक प्रभाव को भी अहमियत दी जाती है।
केबिनेट मंत्री का बयान:
मंत्री विश्वास सारंग ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश और देश के लिए गर्व की बात है।
वैश्विक मंच पर भारत की पहचान:
इस रैंकिंग से भारत के मेडिकल और रिसर्च संस्थानों की वैश्विक स्तर पर पहचान और सशक्त होगी।
डायरेक्टर का योगदान:
एम्स डायरेक्टर डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि यह सफलता टीमवर्क, आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के कारण संभव हो पाई।
एम्स भोपाल की यह उपलब्धि देश के मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च सेक्टर के लिए प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि भारत के संस्थान भी अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

