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रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल। राजधानी भोपाल में राजस्व मामलों के समाधान की रफ्तार बेहद धीमी है। बंटवारा, सीमांकन और अन्य जमीन संबंधी विवादों की गिनती लगातार बढ़ रही है।

सीएम हेल्पलाइन पर भी हजारों शिकायतें लंबित हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता की परेशानी को भी उजागर करती है।


मुख्य बिंदु:

भोपाल में लंबित हैं 38,688 राजस्व मामले

सीएम हेल्पलाइन पर 15,886 शिकायतें लंबित

राजस्व न्यायालयों में सीमांकन व बंटवारे के मामले सबसे अधिक

शिकायतों के निपटारे में पिछड़ रहे हैं अधिकारी

गुना, अशोकनगर, शिवपुरी जैसे जिले भी हैं लिस्ट में शामिल

जनसुनवाई और हेल्पलाइन पर भी नहीं हो रहा त्वरित समाधान

राजस्व विभाग की धीमी कार्यप्रणाली से लोगों की बढ़ी परेशानी


भोपाल की स्थिति बेहद चिंताजनक

राजस्व विभाग के विशेष अभियान और टॉप टू बॉटम मॉनिटरिंग के बावजूद भोपाल संभाग लगातार पिछड़ता जा रहा है। राजधानी में कुल 38,688 मामले लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा केस सीमांकन और बंटवारे से जुड़े हुए हैं।

भोपाल जिले में राजस्व न्यायालयों में कुल 12,678 मामले लंबित हैं। इनमें से बंटवारे के 926, सीमांकन के 2282 और अन्य प्रकार के 9470 केस शामिल हैं। ये आंकड़े सरकार की योजना और ज़मीनी कार्य के बीच भारी अंतर दिखाते हैं।


अन्य जिलों में भी हालत खराब

जिला सीमांकन के केस बंटवारे के केस कुल लंबित केस

गुना 713, 419, 5404
अशोकनगर 4964, 4186, 8872
शिवपुरी 4624, 904, 6125

गुना और अशोकनगर में सीमांकन और बंटवारे के केसों की संख्या सबसे ज्यादा है। अधिकारियों की निष्क्रियता और निगरानी तंत्र की कमजोर पकड़ इसका बड़ा कारण है।


सीएम हेल्पलाइन की भी हालत खस्ता

सीएम हेल्पलाइन पर भोपाल जिले की 15,886 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से 27 प्रतिशत शिकायतें दो महीने से अधिक पुरानी हैं। यह बताता है कि जनता की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

लोगों की शिकायत है कि वे बार-बार जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।


जनसुनवाई में भी नहीं मिल रहा न्याय

प्रशासन द्वारा हर मंगलवार को जनसुनवाई की जाती है, लेकिन वहाँ भी समाधान का प्रतिशत कम ही रहता है। अधिकतर मामलों में फाइलें लंबित पड़ी हैं या कार्रवाई अधूरी है। इससे नागरिकों का भरोसा घट रहा है।


विशेष अभियान भी रहे बेअसर

प्रदेश सरकार ने राजस्व मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाए थे, लेकिन उन अभियानों का ज़मीनी असर नज़र नहीं आया। अधिकारी सीमांकन और बंटवारे के मामलों को टालते रहे, जिससे समाधान में देरी होती गई।


जनता की मांग – हो ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम

लोगों की मांग है कि हर राजस्व मामले की ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा दी जाए जिससे उन्हें पता चल सके कि उनकी फाइल कहां और किस अधिकारी के पास अटकी हुई है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।


भोपाल और आसपास के जिलों में राजस्व मामलों का बढ़ता अंबार प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। सीमांकन, बंटवारा और भूमि विवाद जैसे मामलों का समय पर समाधान न होने से न केवल जनता परेशान है बल्कि प्रशासन की साख भी गिर रही है। जरूरत है एक पारदर्शी, त्वरित और डिजिटल प्रक्रिया अपनाने की ताकि लोगों को न्याय समय पर मिल सके।

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