रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल |
भारतीय राजनीति की फायरब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने बयानों और स्पष्ट विचारों के लिए जानी जाने वाली उमा भारती ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और व्यापक राजनीतिक व्यवस्था पर कुछ तीखे सवाल भी उठाए हैं।
“मैं अभी राजनीति से रिटायर नहीं हुई हूं”
मीडिया से बात करते हुए उमा भारती ने कहा,“जैसे डॉक्टर और वकील कभी रिटायर नहीं होते, वैसे ही मैं भी राजनीति से रिटायर नहीं हुई हूं।” यह बयान अपने आप में साफ संकेत है कि उमा भारती राजनीति में अब भी सक्रिय रहना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहती है, तो वे पूरी ऊर्जा और निष्ठा के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं।
परिवार को लेकर नाराजगी भी जताई
उमा भारती ने इस बात पर भी खुलकर नाराजगी जताई कि उनके परिवार को राजनीति में पर्याप्त जगह नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार को जिस तरह से नजरअंदाज किया गया, वह ठीक नहीं है। उन्हें मौका तक नहीं मिला।”
गोरक्षा और शराबबंदी पर जारी रहेगा संघर्ष
उमा भारती ने साफ किया कि गोरक्षा, शराबबंदी और गोकाष्ठ जैसे सामाजिक मुद्दों पर उनका संघर्ष जीवनभर जारी रहेगा। उन्होंने इन्हें केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक विषय बताया और कहा कि इनपर उन्होंने काफी पहले से काम शुरू किया था।
उम्र सीमा पर तीखी टिप्पणी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राजनीति में सक्रिय रहने की 75 वर्ष की उम्र सीमा पर टिप्पणी के संदर्भ में उमा भारती ने कहा, “मैं अभी 75 साल की नहीं हुई हूं। यह सीमा मेरे ऊपर लागू नहीं होती। पार्टी कहे तो मैं चुनाव भी लड़ सकती हूं।”
क्या फिर मैदान में दिखेंगी उमा भारती?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमा भारती का यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल भी हो सकता है। खासकर बुंदेलखंड और मध्यप्रदेश में उनका प्रभाव अब भी मजबूत है। अगर वे सक्रिय राजनीति में लौटती हैं, तो आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों में भाजपा के समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।
उमा भारती के राजनीतिक सफर पर एक नजर
- 1990: राजनीति में प्रवेश
- 1992: राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी
- 2003–2004: मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री
- कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री
- सामाजिक मुद्दों पर स्पष्ट व कड़ा रुख
