ऋषिता गंंगराडें

देहरादून (20 जुलाई 2025) – भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 20–21 जुलाई को मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली–एनसीआर सहित आसपास के इलाके भी अलर्ट के दायरे में शामिल हैं।

  • IMD ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि मानसून रेखा राजस्थान और पूर्वी यूपी से हिमालयी क्षेत्र की ओर सरक रही है, जिससे 20 और 21 जुलाई को बेहद तेज बारिश की संभावना है India TV News+9Zee News+9YouTube+9Navbharat Times+3Patrika News+3The Times of India+3
  • सरकती हुई मानसूनी गतिविधि के कारण उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, टिहरी, पौड़ी, रुड़्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर सहित कई जिलों में भारी बारिश, गरज–चमक और तेज हवाओं के साथ संभावित तीव्र मौसम की चेतावनी दी गई है Live Hindustan+1Navbharat Times+1
  • इतनी बारिश के संकेतों से भूस्खलन, नदियों की बाढ़, और सड़क जाम जैसी आपदाएँ उत्पन्न होने की आशंका है Live Hindustan
  • उत्तराखंड ने अभी तक इस मानसून में औसतन 11% अधिक बारिश दर्ज की है (438 मिमी बनाम 395 मिमी क्रमिक औसत) Live Hindustan+1The Times of India+1

अलर्ट स्तर और सुरक्षा उपाय:

  • ऑरेंज अलर्ट (20–21 जुलाई): बेहद भारी बारिश, बिजली गिरने, तेज हवाओं से सतर्क रहें The Times of India+1Navbharat Times+1।
  • येलो अलर्ट (17–18 जुलाई): नैनीताल, देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, पहाड़ी इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनीNavbharat Times+2Navbharat Times+2Navbharat Times+2।
  • रेड अलर्ट (19 जुलाई): बागेश्वर, चंपावत और ऊधम सिंह नगर में अत्यंत भारी बारिश को लेकर नोटिसNavbharat Times+6Live Hindustan+6Navbharat Times+6।

निवारक उपाय:

  • स्थानीय प्रशासन और SDRF को आपातकालीन स्थिति के लिए सतर्क रखा गया है The Times of IndiaNavbharat TimesNavbharat Times।
  • लोगों को पर्वतीय तथा नदी किनारे के इलाकों से दूर रहने, अनावश्यक यात्रा टालने, मौसम अपडेट नियमित रूप से देखने की सलाह दी गई है Navbharat TimesDynamite NewsLive Hindustan।
  • पर्वतारोहण और ट्रेकिंग गतिविधियों को रोककर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्देश जारी किया गया है The Times of IndiaIndia TV News।

उत्तराखंड और यूपी में मानसून की सक्रियता ने भारी बारिश की परिस्थिति पैदा कर दी है, जो पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों के खतरे को और बढ़ा सकता है। इस स्थिति में बचाव‑प्रबंधन टीमें, प्रशासन और नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

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