ऋ्षिता गगंराडे़
भारत में डिजिटल भुगतान (UPI, PhonePe, Google Pay) का प्रसार तेजी से बढ़ा है। इस बदलाव ने न केवल व्यापार, बल्कि ग़रीबी की स्वरूप को भी प्रभावित किया है। अब भिखारियों ने भी QR कोड के ज़रिए भुगतान स्वीकार करने का नया तरीका अपनाया है।
1. असम की गुवाहाटी में एक अनूठा वीडियो वायरल
- मार्च 2024 में गुवाहाटी में एक दृष्टिहीन भिखारी को गले में PhonePe QR कोड लटकाए सड़क पर भीख मांगते हुए देखा गया।
- उस वीडियो में वह कारों के पास उस QR कोड को स्कैन करते हुए ₹10 प्राप्त करता है और ट्रांज़ेक्शन की पुष्टि ऐप से सुनकर करता है। NDTV India+3punjabkesari+3ABP Live+3ABP Live+3NDTV India+3punjabkesari+3
- कांग्रेस नेता गौरव सोमानी ने इसे ट्वीट करते हुए लिखा:”Technology truly knows no bounds. It’s a testament to the power of technology to transcend barriers” NDTV IndiaThe Indian Express+5mint+5India Today+5
2. मिड-डे की रिपोर्ट: बिहार का ‘डिजिटल भिखारी’
- रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के रघुवंश झारखंडी (या Raju Prasad) नामक व्यक्ति ने Google Pay, Paytm, UPI QR कोड समेत कई डिजिटल वॉलेट को अपनाया।
- उन्होंने कहा:“ लोग छुट्टे नहीं लेकर आते, इसलिए मैंने बैंक खाता खोला और QR कोड भी इस्तेमाल किए” Mid-day
3. सोशल मीडिया अनुमोदन और आलोचना
- Reddit जैसे मंचों पर उपयोगकर्ताओं ने इस प्रवृत्ति को “डाउन-टू-अर्थ आधुनिक भिक्षा” बताया:”People used to shoo me away saying they didn’t have cash. Now, they scan my QR codes and happily give whatever small amount…” – Raju Prasad Live Hindustan+3punjabkesari
- कुछ यूज़र घटना को संघठित सेटअप मानते हैं:“It’s an organized setup man.” Reddit
4. फायदे और चुनौतियाँ
फायदे
- भुगतान में सुविधा: कैश न होने पर भी लोग अकस्मात मदद कर सकते हैं।
- डिजिटल समावेशन: ऐसे लोग भी UPI नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं जो पहले नकद‑केन्द्रीकृत व्यवस्था में ही थे। च
चुनौतियाँ
- गोपनीयता जोखिम: UPI ID अक्सर मोबाइल नंबर पर आधारित रहती है; किसी QR को स्कैन करता तो नंबर लीक हो सकता है।
- साइबर फ्रॉड की आशंका: अशिक्षित भिखारियों को स्कैमर्स QR कोड का दुरुपयोग करा सकते हैं (डाटा एक्सपोज़र, फर्जी भुगतान ट्रांज़ेक्शन आदि) Reddit
5. सामाजिक और नीति‑निर्देशक मुद्दे
- क्या यह श्रम की गरिमा का पतन है, या तकनीकी समावेशन की थाली?
- प्रशासन को इस मोड़ पर यह तय करना होगा कि QR कोड आधारित भिक्षा को कैसे विनियमित किया जाए — क्या यह एक पेशे के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकता है, या इसमें सामाजिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा मामलों की निगरानी आवश्यक है?
डिजिटल भिक्षा—जिसमें QR कोड‑पोषक भीखिया लोगों से UPI माध्यम से लेने लगे—तकनीकी प्रगति का चौंकाने वाला परिणाम है। जबकि यह आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से सीधा जुड़ने का रास्ता खोलता है, साथ ही साथ गोपनीयता और धोखाधड़ी की चिंताओं को भी जन्म देता है। सरकार, समाज और तकनीकी प्लेटफ़ॉर्मों को मिलकर यह दायरा तय करने की ज़रूरत है कि इन प्रयासों को सकारात्मक रूप में कैसे स्वीकारा जाए, और संभव जोखिमों को कैसे न्यूनतम किया जाए।
