रोहित रजक रिपोर्ट भोपाल। बोरोप्लस क्रीम को लेकर कंपनी द्वारा किया गया “दुनिया की नंबर वन एंटीसेप्टिक क्रीम” का दावा झूठा पाया गया है।

इस झूठे विज्ञापन पर उपभोक्ता आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया है और साथ ही कहा है कि वे इस तरह के भ्रामक दावे वाले विज्ञापन को तुरंत सुधारें।

क्या है पूरा मामला?

भोपाल निवासी एक उपभोक्ता ने बोरोप्लस क्रीम की एक ट्यूब खरीदी थी, जिस पर लिखा था कि यह “विश्व की नंबर वन एंटीसेप्टिक क्रीम” है। लेकिन जब उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या सर्टिफिकेट नहीं पाया, तो मामला जिला उपभोक्ता आयोग में पहुंच गया।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया

कि आखिर किस आधार पर बोरोप्लस को दुनिया की नंबर एक क्रीम बताया गया है। न तो कंपनी ने इस दावे का कोई सबूत दिया और न ही कोई आधिकारिक मान्यता पत्र दिखाया।

कंपनी ने नहीं दिया जवाबइस मामले में उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को नोटिस भेजा और जवाब मांगा, लेकिन कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

इसके चलते आयोग ने इसे एकतरफा निर्णय मानते हुए कंपनी पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया और विज्ञापन में सुधार करने का आदेश दिया।

आयोग की सख्त जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव और सदस्य कल्पना शर्मा की बेंच ने यह आदेश सुनाया। उन्होंने कहा कि बिना किसी सर्टिफिकेट या अधिकृत प्रमाण के उत्पाद को “दुनिया में नंबर वन” बताना सरासर गलत है। इससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है और यह कानून का उल्लंघन है।

विज्ञापन में सुधार का आदेशआयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद के बारे में कोई बड़ा दावा करती है, तो उसे उसके समर्थन में प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा।

वरना इस तरह का प्रचार अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। बोरोप्लस कंपनी को अब भविष्य में विज्ञापनों में इस दावे को हटाकर सुधारित विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया गया है।

उपभोक्ताओं के लिए सबक का यह मामला सिर्फ बोरोप्लस तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है कि कोई भी उत्पाद जब “सर्वश्रेष्ठ”, “नंबर वन” या “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित” जैसे दावे करे, तो उपभोक्ता को भी सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।

साथ ही कंपनियों को भी चाहिए कि वे पारदर्शिता बरतें और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले विज्ञापन न करें।इस फैसले से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को मजबूती मिली है और कंपनियों को भी स्पष्ट संकेत गया है कि अब झूठे दावे नहीं चलेंगे।

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