काजल जाटव: दिल्ली के रोहिणी कोर्ट के परिसर में अब वादी, यानी वो लोग जो केस दर्ज करवाने या सुनवाई में भाग लेने आते हैं, वहां ब्लैक पैंट और सफेद शर्ट नहीं पहन सकेंगे। इसकी जानकारी रोहिणी बार एसोसिएशन ने दी है। उनका कहना है कि ये फैसला कोर्ट की व्यवस्था को बेहतर बनाने और वकीलों की पहचान साफ-सुथरी रखने के लिए लिया गया है।
वकीलों की पोशाक की नकल पर आपत्ति
दरअसल, कुछ वादी जानबूझकर वकीलों जैसी पोशाक ब्लैक पैंट और सफेद शर्ट पहनकर अदालत पहुंचते हैं। इससे भ्रम की स्थिति बन जाती है और कोर्ट स्टाफ या जजों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन वकील है और कौन नहीं। ऐसे में कोर्ट का अनुशासन बनाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाता था। इसी को ध्यान में रखते हुए, बार एसोसिएशन ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जो वकील नहीं हैं, यानी वो वादी, गवाह या कोई भी आम व्यक्ति जो वकील नहीं हैं, उन्हें कोर्ट के अन्दर कोर्ट की तय पोशाक नहीं पहननी चाहिए। अगर कोई ऐसा करता पाया गया, तो उन्हें कोर्ट परिसर में प्रवेश से रोका जा सकता है या निकाला भी जा सकता है।
जारी किया गया सर्कुलर
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव ने मिलकर कहा है कि यह फैसला कोर्ट की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। वकीलों के तौर पर पहचाने जाने वाले कपड़े खासकर तभी पहनने चाहिए जब आप वकील ही हैं, ताकि लोगों को आसानी से समझ आ सके कि आप वकील हैं और आपका काम क्या है। साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ लोग वादी वकील जैसी दिखने का फायदा उठाकर किसी को गुमराह कर सकते हैं, जिससे कोर्ट व्यवस्था बिगड़ सकती है।
अब जनता की प्रतिक्रिया इस फैसले पर मिली-जुली साफ नजर आ रही है। कुछ का कहना है कि यह सही कदम है, इससे कोर्ट का माहौल अच्छा बनेगा। दूसरी ओर, कुछ लोग सोचते हैं कि यह निर्णय जरूरी नहीं, क्योंकि किसी की पोशाक देखते ही उसकी मंशा का पता नहीं चलता। इसके बाद ये भी चर्चा है कि दूसरे जिला कोर्ट की बार एसोसिएशनों पर भी इसका असर हो सकता है। जैसे दिल्ली के कड़कड़डूमा, साकेत और पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में भी इस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं ताकि कोर्ट के माहौल में साफ-सफाई और अनुशासन बना रहे।

